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Alwar Jagannath Mela: जानकी मैया को ब्याह कर अपने धाम लौटे भगवान जगन्नाथ, रथयात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब

Alwar Jagannath Mela: अलवर में भगवान जगन्नाथ अपनी दुल्हन जानकी जी को ब्याह कर आदर-सत्कार के साथ अपने धाम पुराना कटला स्थित सुभाष चौक मंदिर लौट आए। इस पावन पल का साक्षी बनने और वर-वधू के स्वागत के लिए पूरा शहर सड़कों पर उमड़ पड़ा।
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जानकी मैया को ब्याह कर अपने धाम लौटे भगवान जगन्नाथ (फोटो - पत्रिका)

Alwar Jagannath Mela: राजस्थान के अलवर शहर में सोमवार की रात बेहद खास और भक्तिमय माहौल लेकर आई। रूपबास स्थित रूपहरि मंदिर से शाम करीब 7 बजे शुभ मुहूर्त में भगवान जगन्नाथ और जानकी मैया को भव्य 'इन्द्र विमान' यानी रथ में विराजमान किया गया। रथयात्रा की रवानगी से ठीक पहले पुलिस की टुकड़ी ने भगवान को गार्ड ऑफ ऑनर देकर सलामी दी।

इस पल के दौरान रूपबास की ग्रामीण महिलाओं ने अपनी लाडली बेटी जानकी को भारी मन और नम आंखों से विदा किया। महिलाओं ने पारंपरिक मांगलिक गीत गाकर जानकी मैया और भगवान जगन्नाथ के सुखद दांपत्य जीवन की मंगल कामना की। मंदिर के आसपास हजारों भक्तों की भीड़ दर्शनों के लिए टकटकी लगाए खड़ी रही।

रथ को रोककर भगवान की आरती उतारी

अपने आराध्य और नई दुल्हन के स्वागत के लिए पूरे शहर ने पलक-पावड़े बिछा दिए थे। रथयात्रा रूपबास से शुरू होकर मालवीय नगर, मिनी सचिवालय, मोतीडूंगरी, एसएमडी चौराहा, नंगली सर्किल, कंपनी बाग, चर्च रोड, होप सर्कस और बजाजा बाजार से होती हुई देर रात अपने गंतव्य सुभाष चौक मंदिर पहुंची। रास्ते में पड़ने वाले सभी प्रमुख मंदिरों के बाहर रथ को रोककर भगवान की भव्य आरती उतारी गई। यात्रा में बजते बैंड-बाजे, विभिन्न मंडलों की मनमोहक झांकियां और अखाड़े के कलाकारों के करतब लोगों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बने रहे।

जमकर खरीदारी की

प्रताप ऑडिटोरियम से लेकर नंगली चौराहे तक देर रात तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा रही। कंपनी बाग से चर्च रोड के बीच करीब एक दर्जन से ज्यादा सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं की ओर से भंडारे आयोजित किए गए, जहां भक्तों को प्रसादी बांटी गई। स्वागत में दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठानों को रोशनी से सजाया था। रास्ते में सजी दुकानें, झूले और जगह-जगह जलसेवा के साथ बजते धार्मिक भजनों ने पूरे इलाके को उत्सव के रंग में रंग दिया, जहां बच्चों से लेकर बड़ों ने जमकर खरीदारी भी की।

भगवान जगन्नाथ और जानकी मैया के सुभाष चौक मंदिर प्रवेश करते ही इस वर्ष की मुख्य रथयात्रा का समापन हो गया। इसके साथ ही मंदिर में 'बूढ़े जगन्नाथ जी' के दर्शन भी श्रद्धालुओं के लिए बंद हो गए। अब इस ऐतिहासिक जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव का औपचारिक समापन गुरु पूर्णिमा के दिन होगा। उस दिन मंदिर में माता जानकी की पारंपरिक 'मुंह दिखाई' की रस्म निभाई जाएगी, जिसके बाद विशेष हवन, महाआरती और शाम को गोलख पूजन का आयोजन किया जाएगा।