नीति शास्त्र में मनुष्य के उन गुणों अथवा स्वभाव का जिक्र है जिससे व्यक्ति की पहचान की जा सकती है। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में बताया है कि इस दुनिया में कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्हें अन्य लोगों की तकलीफों से कोई फर्क नहीं पड़ता...
परम विद्वान आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में अच्छे बुरे-लोगों अथवा मित्र-शत्रु की पहचान करने का मार्ग भी प्रशस्त किया है। उनके नीति शास्त्र में मनुष्य के उन गुणों अथवा स्वभाव का जिक्र है जिससे व्यक्ति की पहचान की जा सकती है। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में बताया है कि इस दुनिया में कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्हें अन्य लोगों की तकलीफों से कोई फर्क नहीं पड़ता...
1. यमराज
चाणक्य नीति के अनुसार मृत्यु के देवता यमराज पर आपके दुखों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उन्हें बस अपना कर्म करना है जो कि है वक्त आने पर मनुष्य के प्राण हर लेना। क्योंकि अगर यमराज आपके दुखों का सोचकर अपने कर्म से पीछे हट जाएंगे तो फिर सृष्टि के नियम ही बदल जाएंगे और फिर किसी की मृत्यु ही नहीं होगी।
2. राजा
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि राजा यानी शासन व्यवस्था को दूसरे लोगों के दुख-दर्द से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उन्हें कानून के नियमों की पालना करते हुए निष्पक्ष फैसला लेना होता है। और अगर वे आपकी भावनाओं की चिंता में फंस जाएंगे तो कहीं न कहीं सच की अनदेखी हो सकती है।
3. वैश्या
चाणक्य नीति में एक वैश्या के स्वभाव को भी ऐसा बताया है जिसे बस अपने काम और पैसों से मतलब होता है। उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई व्यक्ति किस पीड़ा से गुजर रहा है या उसे क्या दुःख है।
4. छोटे बच्चे
छोटे बच्चे भी किसी के दुःख-दर्द से परेशान नहीं होते हैं। क्योंकि उनमें इतनी समझ ही नहीं होती कि क्या सही है और क्या गलत। इसलिए वे आपकी भावनाओं या तकलीफों से अंजान होते हैं।
4. अग्नि
आचार्य चाणक्य के अनुसार अग्नि या आग की प्रकृति ही जलाने की होती है। इसलिए प्राणियों की तकलीफों का उस पर कोई असर नहीं होता। अग्नि तो बिना किसी भेदभाव के अपनी चपेट में आने वाली हर चीज को भस्म कर देती है। यानी उसे किसी के दु:ख-दर्द से कोई सरोकार नहीं होता।
5. चोर
चाणक्य नीति कहती है कि एक चोर भी कभी किसी के दुख की परवाह नहीं करता। चोर को तो चोरी करने से मतलब होता है। उसे बस आपके घर से सामान चोरी करके भागना है। वह यह नहीं समझता कि उससे आपको कितनी परेशानी या दुःख होगा।