
Navratri : शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की उपासना की जाती है। वे विशेष रूप से मानसिक शांति और धन संपत्ति दायक हैं। मां चंद्रघंटा देवी दुर्गा का तीसरा स्वरूप हैं। धनलाभ के लिए उनकी पूजा का खास महत्व है। मां चंद्रघंटा का रूप स्वर्णिम है। उन्हें दूध से बनी मिठाइयां और खीर प्रिय हैं। मां चंद्रघंटा का वाहन सिंह (शेर) है। उनके आशीर्वाद से भक्त अथाह संपत्ति प्राप्त कर सकते हैं।
शरीर स्वर्ण (सोने) के समान- धर्माचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि मां चंद्रघंटा के मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित रहता है। यह घंटे के आकार का है इसलिए मां को 'चंद्रघंटा' कहा जाता है। मां चंद्रघंटा का शरीर स्वर्ण (सोने) के समान है।
सुनहरा और नारंगी रंग मां चंद्रघंटा को प्रिय हैं। फूलों में उन्हें सफेद कमल, लाल गुलाब और चमेली पसंद हैं। मां चंद्रघंटा को भोग में विशेष रूप से दूध से बनी खाद्य वस्तुएं अर्पित करना चाहिए। खीर या दूध से बनी अन्य मिठाई मां को प्रिय हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर बताते हैं कि भौतिक सुखों के लिए मां चंद्रघंटा की उपासना श्रेष्ठ मानी जाती है। उनके आशीर्वाद से भक्त मानसिक रूप से बेहद शांत हो जाते हैं। उनका डर समाप्त होता है, साहस व आत्मविश्वास बढ़ता है। मां चंद्रघंटा के प्रभाव से नकारात्मक शक्तियां कमजोर हो जाती हैं। शत्रु नाश के लिए भी उनकी आराधना की जाती है।
मां चंद्रघंटा की साधना आध्यात्मिक प्रगति के लिए सहायक मानी जाती है। इससे भक्तों को गहन आत्म शक्ति प्राप्त होती है।मां चंद्रघंटा की पूजा से यश मिलता है। वे नवग्रहों में शुक्र की अधिष्ठात्री देवी हैं। ज्योतिष और धर्मग्रंथों के अनुसार मां चंद्रघंटा से शुक्र ग्रह को नियंत्रित करती हैं। मां चंद्रघंटा के मस्तक पर स्थित अर्ध चंद्र का विशेष महत्व है। इससे भक्त मानसिक रूप से स्थिर होते हैं। भय और संकटों से मुक्ति और धन संपत्ति का लाभ चाहते हैं तो मां चंद्रघंटा की आस्थापूर्वक आराधना जरूर करें।
प्रमुख मंत्र:
"ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चंद्रघंटायै नमः"
"ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः"
"या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"
ध्यान मंत्र:
"पिंडज प्रवरारूढा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं, चंद्रघंटेति विश्रुता।।"