धर्म

Navratri Day 1: आज मां शैलपुत्री का दिन, जानें पूजा विधि, मंत्र और शुभ भोग

Navratri Day 1 : मां शैलपुत्री के पूजन के साथ नवरात्रि का शुभारंभ, माता के आशीर्वाद से मिलता है स्वास्थ्य सुख
2 min read
• •
Oct 11, 2026
durgaji
माता दुर्गा - Image AI Grok

Navratri Day 1 : आज से शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो गए हैं। मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री देवी की आराधना की जाएगी। पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लेने के कारण मां का नाम 'शैलपुत्री' पड़ा। नवरात्र के पहले दिन योग साधना प्रारंभ होती है। योगी द्वारा मन को 'मूलाधार' चक्र में स्थित किया जाता है।

पूजा विधि

सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और सूर्य को अर्घ्य दें। इसके बाद पूजास्थल पर गंगा जल या नर्मदा जल छिड़ककर उत्तर-पूर्व दिशा यानि ईशान कोण में चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर दुर्गाजी को विराजित करें। देशी घी का दीपक जलाकर मां कलश स्थापना करें और मां शैलपुत्री का स्मरण करते हुए नवरात्रि पूजा का संकल्प लें। इसके बाद गणेशजी का ध्यान करें, महादेव से आशीर्वाद प्राप्त करें और पूजा, मंत्र जाप प्रारंभ कर दें।

श्लोक
वन्दे वंछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम् |
वृषारूढाम् शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् ||

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई के अनुसार मां शैलपुत्री के मंत्र

सरल मंत्र:
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः

बीज मंत्र:
ह्रीम शिवाय नमः

ध्यान मंत्र:
वंदे वांछित लाभाय चंद्रार्ध कृतशेखराम।
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

मां का प्रिय भोग

मां शैलपुत्री को गाय का शुद्ध देसी घी अर्पित करें। इससे स्वास्थ्य सुख प्राप्त होता है। उन्हें सफेद वस्तुएं प्रिय हैं। इसलिए मां शैलपुत्री को गाय के दूध से खीर बनाकर अर्पित करें, भोग के रूप में सफेद बर्फी चढ़ाएं। मलाई या मावे की मिठाई भी चढ़ा सकते हैं।

कलश स्थापना का महत्व
नवरात्रि में दुर्गा पूजन में घट स्थापना का बहुत महत्व है। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि शारदीय नवरात्रि में प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9.19 बजे से शुरु हो चुकी है जोकि आज यानि रविवार की रात 9.30 बजे तक रहेगी। 11 अक्टूबर को नवरात्र के प्रारंभिक दिन से व्रत की शुरुआत होगी जोकि पूरे नौ दिनों तक चलेगा। नवरात्र में कलश स्थापना के साथ ही 9 दिनों की मां की आराधना प्रारंभ होती है।

तांबे या पीतल के कलश पर कलावा लपेटकर चंदन, रोली से स्वास्तिक बनाएं। इसमें शुद्ध जल भरें और पूजा की सुपारी, हल्दी की एक गांठ, अक्षत व एक सिक्का डालें। कलश के मुख पर आम के पत्ते रखकर इसके ऊपर नारियल रख दें। अब इसे चौकी पर स्थापित करें।

Updated on:
11 Oct 2026 06:34 am
Published on:
11 Oct 2026 06:34 am