दुनिया का सबसे बड़ा और भारी शिवलिंग बिहार के इस जिले में, दिलचस्प खासियत!
Religon Dharm News, पूर्वी चंपारण (कैथवलिया): श्रद्धा, सब्र और स्थापत्य कला का एक अद्भुत संगम बिहार की धरती पर जीवंत हो उठा है। पिछले दिनों जब हर-हर महादेव के उद्घोष से चंपारण की हवाएं गूंजी, तो लगा मानो साक्षात् महादेव आशीर्वाद देने आ गए हों। तमिलनाडु के महाबलीपुरम से करीब 21,00 किलोमीटर की लंबी और ऐतिहासिक यात्रा तय कर विश्व का सबसे बड़ा और भारी एकाश्म (Monolithic) शिवलिंग अब अपनी मंजिल, विराट रामायण मंदिर पहुंच चुका है।
यह केवल एक पत्थर नहीं, बल्कि 10 साल की कठोर तपस्या का परिणाम है। काले ग्रेनाइट के एक ही पत्थर को तराश कर बनाया गया यह शिवलिंग 33 फीट ऊंचा है। इसका वजन 210 टन है। इसे लाने के लिए विशेष ट्रेलरों का सहारा लिया गया। करीब 40 दिनों की यात्रा के बाद, जब यह बिहार की सीमा में पहुंचा, तो भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। फूलों की वर्षा और शंखनाद के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने पलक-पावड़े बिछाकर भोलेनाथ का स्वागत किया। यह नजारा ऐसा था, मानो भक्त साक्षात शिव के दर्शन कर रहे हों।
महावीर मंदिर न्यास (पटना) इस अद्भुत मंदिर को बना रहा है। यह विराट रामायण मंदिर, दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक केंद्रों में से एक होगा। इस मंदिर परिसर में कुल 18 मंदिर होंगे, जिनमें यह विशाल शिवलिंग मुख्य आकर्षण का केंद्र होगा।
स्थापना की तिथि: 21 जनवरी 2026 (संभावित)
विशेषता: दुनिया का सबसे बड़ा और वजनी शिवलिंग।
यह क्षण, बिहार के धार्मिक पर्यटन के इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगा। भक्तों को अब उस पल की प्रतीक्षा है, जब जनवरी 2026 में इस महाकाय शिवलिंग का जलाभिषेक होगा और आस्था का यह केंद्र पूरी दुनिया का मन मोहेगा।