
Sankashti Chaturthi Shubh Muhurt: संकष्टी चतुर्थी को सकट चतुर्थी के नाम से भी जानते हैं। दृक पंचांग के अनुसार संकष्टी चतुर्थी 2023 (Sankashti Chaturthi 2023) दस जनवरी को दोपहर 12.09 बजे शुरू हो रही है, जबकि यह तिथि 11 जनवरी दोपहर 2.31 बजे संपन्न हो रही है। संकष्टी चतुर्थी को चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व होता है, और चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। इसलिए संकष्टी चतुर्थी व्रत दस जनवरी को ही रखा जाएगा। इस दिन चंद्रोदय का समय रात 8.48 बजे है।
संकष्टी चतुर्थी के ये उपाय दिलाएंगे भगवान गणेश की कृपा
1. संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान श्री गणेश को गेंदे का फूल, मोदक और गुड़ का नैवेद्य अर्पित करना चाहिए।
2. श्रीगणेश को सिंदूर अत्यंत प्रिय है। इसलिए संकष्टी चतुर्थी के दिन श्री गणेश के पूजन के समय सिंदूर से उनका तिलक करने के बाद खुद का भी सिंदूर से तिलक करें। फिर उनका पूजन करें, इससे सौभाग्य बढ़ता है।
3. अपार धन की इच्छा है तो गणेश स्त्रोत का पाठ करें, मंत्र ऊँ श्रीं ऊँ ह्रीं श्रीं ह्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः की 11 माला जाप करना चाहिए।
4. संकष्टी चतुर्थी पर शमी के पेड़ की पूजा करने से श्री गणेश प्रसन्न होते हैं और दुख दारिद्र दूर होते हैं।
5. जीवन की बड़ी परेशानियों से निजात पाने के लिए गणेशजी को 17 बार दूर्वा अर्पित करें और ऊं गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करें।
6. खुद का घर लेने की तमन्ना है तो संकष्टी चतुर्थी के दिन श्री गणेश पंचरत्न स्त्रोत का पाठ करें, लाभ होगा।
7. जीवन में विशिष्ट उपलब्धि चाहते हैं तो पूजा में लाल वस्त्र और लाल चंदन का प्रयोग करें। शांति और संतान की प्रगति की इच्छा है तो सफेद या पीले वस्त्र धारण कर पूजा करें।
संकष्टी चतुर्थी का महत्व (Sankashti Chaturthi Importance): संकष्टी चतुर्थी व्रत तेलंगाना, आंध्र प्रदेश जैसे दक्षिणी राज्यों और महाराष्ट्र जैसे पश्चिमी राज्य में मुख्य रूप से रहते हैं। मान्यता है कि संकष्टी चतुर्थी व्रत से घर से नकारात्मकता दूर होती है। साथ ही गणेशजी भक्त का हर कष्ट दूर करते हैं।