सावन में मासिक दुर्गाष्टमी का पर्व बहुत महत्व रखता है। हर साल सावन महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रावण दुर्गाष्टमी का व्रत रखा जाता है। इस दिन मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा और आराधना बहुत फलदायी मानी गई है।
हिंदू पंचांग के अनुसार पावन मास सावन की शुरुआत 14 जुलाई 2022 से हो चुकी है। सावन के पूरे महीने में की जाने वाली भगवान शिव की भक्ति और सोमवार व्रत बहुत शुभ माने जाते हैं। वहीं सावन मास की दुर्गाष्टमी का भी अपना खास महत्व होता है। सावन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत रखा जाता है। इस साल यह व्रत 5 अगस्त 2022, शुक्रवार को पड़ रहा है। मान्यता है कि जो भक्त दुर्गाष्टमी के दिन मां दुर्गा की सच्चे मन से और नियमपूर्वक आराधना करता है उससे मां भगवती शीघ्र प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। तो आइए जानते हैं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किन नियमों का ध्यान रखना जरूरी माना गया है...
पूजा के समय इस दिशा में जलाएं धूप-दीप
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार श्रावण मास की दुर्गा अष्टमी के दिन घर के आग्नेय कोण में धूप-दीप जलाने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि मां दुर्गा की पूजा करते समय आपका मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए और पूजन सामग्री दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना सही माना गया है। वहीं ज्योतिष अनुसार पूजा में गंगाजल, सिन्दूर, अक्षत और लाल पुष्प का उपयोग करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं।
पूजा में न करें इन चीजों का इस्तेमाल
जहां ज्योतिष शास्त्र में मां दुर्गा को प्रसन्न रखने ने कई उपाय बताए गए हैं वहीं पूजा में कुछ चीजों के इस्तेमाल की भी मनाही है। दुर्गा अष्टमी की पूजा में ज्योतिष अनुसार आंवला, आक का फूल, मदार, तुलसी के पत्ते तथा दुर्वा का इस्तेमाल करना शुभ नहीं माना जाता।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सूचनाएं सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। patrika.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह ले लें।)
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