
Diwali 2026 : दिवाली पर आज घर-घर में मां महालक्ष्मी का पूजन होगा। दिवाली दीप जलाने और मां लक्ष्मी के स्वागत के पर्व के साथ- साथ जीवन में सुख, संपन्नता, ज्ञान, वैभव और खुशहाली की कामना का भी विशेष अवसर है। पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि माता लक्ष्मी के आठ स्वरूप हैं, जिन्हें अष्टलक्ष्मी कहा जाता है। इन आठ स्वरूपों की आराधना से जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में सुख, समृद्धि और उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कोई स्वरूप धन-संपत्ति प्रदान करता है तो कोई अन्न-धान्य, संतान, विजय, स्वास्थ्य और विद्या का वरदान देता है। धर्माचार्यों, पंडितों के अनुसार दिवाली पर अष्टलक्ष्मी का स्मरण और पूजन करने से घर में सकारात्मकता, संपन्नता और मंगल का वास होता है।
कमलासन पर विराजमान चतुर्भुजी माता के हाथों में कमल, वरमुद्रा और धनवर्षा का स्वरूप है। इनकी आराधना से सुख, संपत्ति और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
धनलक्ष्मी : माता का षड्भुजी स्वरूप चक्र, धनुष, अंकुश और कलश धारण किए हुए है। इनकी पूजा से धन-वैभव और आर्थिक संपन्नता का आशीर्वाद मिलता है।
धान्यलक्ष्मी : अष्टभुजी माता के हाथों में गन्ना, गदा, कमल, चक्र और स्वर्ण पात्र सहित विभिन्न प्रतीक हैं। इनकी आराधना से अन्न-धान्य के भंडार भरे रहने की मान्यता है।
गजलक्ष्मी : चतुर्भुजी माता कमल धारण किए हुए हैं। इनकी उपासना से सुख-समृद्धि, प्रतिष्ठा और वैभव की प्राप्ति होती है।
संतानलक्ष्मी : माता का षड्भुजी स्वरूप संतान सुख और परिवार के कल्याण का प्रतीक है। इनकी आराधना से संतान सुख और आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है।
विजयलक्ष्मी : अष्टभुजी माता शंख, चक्र, गदा, पद्म, खड्ग और ढाल धारण करती हैं। इनकी पूजा से जीवन के कार्यों में सफलता और विजय प्राप्त होने की मान्यता है।
वीरलक्ष्मी : माता का अष्टभुजी स्वरूप साहस, शक्ति और दीर्घायु का प्रतीक है। इनकी आराधना से आयुष्य, आरोग्य और धन-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
विद्यालक्ष्मी : चतुर्भुजी माता के हाथों में कमल, पुस्तक और वरदान की मुद्राएं हैं। इनकी उपासना से ज्ञान और विद्या की प्राप्ति होती है।
दिवाली पर माता अष्टलक्ष्मी की पूजा पूर्ण विधि विधान से करना चाहिए। जहां तक संभव हो, घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में लक्ष्मी पूजन करना चाहिए। यह कोण सर्वाधिक सकारात्मकता प्रदान करनेवाला माना जाता है।