धर्म

सोमवती अमावस्या 2020 : जानें श्रावण अमावस्या/हरियाली अमावस्या का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

श्रावण अमावस्या/हरियाली अमावस्या,जुलाई 20, 2020, जानें इस बार क्यों है खास...

4 min read
Jul 17, 2020
SOMVATI AMAVASYA 2020 : KAB HAI and POOJA VIDHI with shubh muhurat
SOMVATI AMAVASYA 2020 : KAB HAI and POOJA VIDHI with shubh muhurat

हिन्दू कैलेण्डर में नये चन्द्रमा के दिन को अमावस्या कहते हैं। यह एक महत्वपूर्ण दिन होता है क्योंकि कई धार्मिक कृत्य केवल अमावस्या तिथि के दिन ही किये जाते हैं। वहीं सावन मास की अमावस्या को हरियाली अमावस्या (Hariyali Amavasya) के नाम से जाना जाता है।

जो इस बार 20 जुलाई, सोमवार के दिन पड़ रही है। अमावस्या जब सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya) कहते हैं, वहीं अमावस्या जब शनिवार के दिन पड़ती है तो उसे शनि अमावस्या कहते हैं।

सालों बाद बन रहे हैं ये योग...
वहीं इस बार 20 साल बाद हरियाली और सोमवती अमावस्या एक ही दिन 20 जुलाई को मनाई जाएगी। इससे पहले वर्ष 2000 में सोमवती और हरियाली अमावस्या एक ही दिन पड़ी थीं। वहीं इसके अलावा इस सावन मास सोमवार से शुरू होकर सोमवार को ही खत्म हो रहा है। 3 अगस्त तक चलने वाले सावन मास में पांच सोमवार का विशिष्ट योग बना है।

सावन मास में दो सोमवार को विशेष रूप से अमावस्या और पूर्णिमा पड़ रहे है। सावन मास में सोमवती अमावस्या और सोमवती पूर्णिमा का संयोग 47 साल पहले बना था। सावन मास में 5 सोमवार 6 जुलाई प्रतिप्रदा 13 जुलाई अष्टमी, 20 जुलाई अमावस्या, 27 जुलाई सप्तमी, 3 अगस्त पूर्णिमा पर विशेष योग बन रहे है।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार सोमवती अमावस्या को पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति के लिए यानि श्राद्ध रस्मों को करना उपयुक्त माना जाता है। साथ ही कालसर्प दोष निवारण की पूजा के लिए भी अमावस्या का दिन खास होता है। अमावस्या को अमावस या अमावसी के नाम से भी जाना जाता है।

श्रावण अमावस्या/हरियाली अमावस्या मुहूर्त...
जुलाई 20, 2020 को 00:11:42 से अमावस्या आरम्भ
जुलाई 20, 2020 को 23:04:10 पर अमावस्या समाप्त

पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति के लिए अमावस्या के सभी दिन श्राद्ध की रस्मों को करने के लिए उपयुक्त हैं। कालसर्प दोष निवारण की पूजा करने के लिए भी अमावस्या का दिन उपयुक्त होता है। अमावस्या को अमावस या अमावसी के नाम से भी जाना जाता है।

श्रावण अमावस्या/हरियाली अमावस्या का महत्व:

धार्मिक और प्राकृतिक महत्व की वजह से श्रावण अमावस्या बहुत लोकप्रिय है। दरअसल इस दिन वृक्षों के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करने के लिए इसे हरियाली अमावस्या के तौर पर जाना जाता है। वहीं धार्मिक दृष्टिकोण से इस दिन पितरों का पिंडदान और अन्य दान-पुण्य संबंधी कार्य किए जाते हैं।

हरियाली अमावस्या हरियाली तीज से तीन दिन पहले मनाई जाती है। उत्तर भारत के विभिन्न मन्दिरों में और खासतौर पर मथुरा एवं वृन्दावन में, हरियाली अमावस्या के अवसर पर विशेष दर्शन का आयोजन किया जाता है। भगवान कृष्ण के इन विशेष दर्शन का लाभ लेने के लिये बड़ी संख्या में भक्त मथुरा में द्वारकाधीश मन्दिर तथा वृन्दावन में बाँकेबिहारी मन्दिर जाते हैं। गुजरात में, हरियाली अमावस्या को हरियाली अमावस तथा हरियाली अमास के नाम से भी जाना जाता है।

हरियाली अमावस्या पूजा विधि: इस दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा जल से स्नान कर स्वच्छ हो जाएं। सबसे पहले सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद पितरों के निमित्त तर्पण करें। फिर श्रावणी अमावस्या का उपवास करें और जरूरतमंद लोगों को दान-दक्षिणा दें।

श्रावणी अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा का विधान है। हो सके तो इस दिन पीपल, बरगद, केला, नींबू अथवा तुलसी का वृक्षारोपण जरूर करें। हरियाली अमावस्या के दिन नदी या तालाब में जाकर मछली को आटे की गोलियां खिलाना भी बड़ा ही फलदायी बताया जाता है। अपने घर के पास चींटियों को चीनी या सूखा आटा खिलाएं।

उपाय: जीवन में आ रहीं तमाम तरह की परेशानियों से छुटकारा पाना के लिए अमावस्या के दिन हनुमान जी की पूजा करें और हनुमान चालीसा पढ़ें। बजरंगबली को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं। मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए घर के ईशान कोण में घी का दीपक जलाएं।

इससे दरिद्रता दूर होने की मान्यता है। शाम को शिवजी की विधिवत पूजन करें और उन्हें खीर का भोग लगाएं। ऐसा करने से शिवजी प्रसन्न होते हैं। अमावस्या की रात को पूजा करते समय पूजा की थाली में स्वस्तिक या ऊं बनाकर उस पर महालक्ष्मी यंत्र रखें।

श्रावण अमावस्या व्रत और धार्मिक कर्म
सावन मास में बारिश के आगमन से धरती का कोना-कोना हरा-भरा होकर खिल उठता है। चूंकि श्रावण अमावस्या पर पेड़-पौधों को नया जीवन मिलता है और इनकी वजह से ही मानव जीवन सुरक्षित रहता है, इसलिए प्राकृतिक दृष्टिकोण से भी हरियाली अमावस्या का बहुत महत्व है। इस दिन किये जाने वाले धार्मिक कर्म इस प्रकार हैं-

: इस दिन नदी, जलाशय या कुंड आदि में स्नान करें और सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद पितरों के निमित्त तर्पण करें।
: पितरों की आत्मा की शांति के लिए उपवास करें और किसी गरीब व्यक्ति को दान-दक्षिणा दें।
: इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा की जाती है और इसके फेरे लिये जाते हैं।
: हरियाली अमावस्या पर पीपल, बरगद, केला, नींबू, तुलसी आदि का वृक्षारोपण करना शुभ माना जाता है। क्योंकि इन वृक्षों में देवताओं का वास माना जाता है।
: वृक्षारोपण के लिये उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपदा, रोहिणी, मृगशिरा, रेवती, चित्रा, अनुराधा, मूल, विशाखा, पुष्य, श्रवण, अश्विनी, हस्त आदि नक्षत्र श्रेष्ठ व शुभ फलदायी माने जाते हैं।
: किसी नदी या तालाब में जाकर मछली को आटे की गोलियां खिलाएं अपने घर के पास चींटियों को चीनी या सूखा आटा खिलाएं।
: सावन हरियाली अमावस्या के दिन हनुमान मंदिर जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। साथ ही हनुमानजी को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं।

Updated on:
16 Jul 2020 11:44 pm
Published on:
17 Jul 2020 10:20 am