
Magh Snan in Rajasthan: मकर संक्राति और माघ मास के पावन अवसर पर, यदि आप प्रयागराज संगम तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, तो जयपुर का गलता तीर्थ आपके लिए मोक्ष का द्वार खोल सकता है। संत गालव की तपोस्थली और सात पवित्र कुंडो की महिमा से सराबोर यह स्थान उत्तर तोताद्रि के नाम से विख्यात है। इस लेख में समझिए, गलता तीर्थ इतना पवित्र और फलदायी कैसे है।
जयपुर की गुलाबी आभा के बीच अरावली की पहाडियो में बसा गलता तीर्थ केवल एक दर्शनीय स्थल नही बल्कि आस्था का वह महासागर है जिसे उत्तर तोताद्रि और राजस्थान की काशी कहा जाता है। यदि आप इस माघ मास या मकर संक्राति पर प्रयागराज जाने की अभिलाषा रखते थे लेकिन किसी कारणवश नही जा पा रहे तो निराश न हो। गालव ऋषि की यह तपोस्थली आपको वही आध्यात्मिक ऊर्जा और पुण्य प्रदान करने मे सक्षम है।
लोक मान्यताओं के अनुसार यहां ऋषि गालव ने हजारों वर्षों तक कठोर तप किया था। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवताओं ने इस स्थान को अमर जल से सिंचित किया। यहां की मुख्य खासियत गलता कुंड है, जिसका जल कभी नहीं सूखता। गौमुख से गिरती जलधारा सात अलग-अलग कुंडों को भरती है। इसे मां गंगा का स्वरूप माना जाता है।
सनातन धर्म में सप्त पुरी और चार धाम की यात्रा का विशेष महत्व है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलता जी के दर्शन के बिना ये यात्राएं अधूरी मानी जाती हैं? ऐसी मान्यता है कि जो श्रद्धालु माघ स्नान के लिए त्रिवेणी संगम नही पहुंच पाते वे यदि गलता जी के पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगा लें, तो उन्हें भी गंगा स्नान जैसा लाभ मिलता है।
पौराणिक रूप से इसे सतयुग से जुड़ा माना जाता है। कहते हैं कि, यहां ऋषि गालव ने हजारों वर्षों तक तपस्या की थी। हालांकि, मंदिरों और कुंड 16वीं से 18वीं सदी में बनाए गए। साथ ही 1734 में सूर्य मंदिर का निर्माण और कृष्णदास पायोहारी द्वारा 16वीं सदी में वैष्णव पीठ की स्थापना हुई।
मकर संक्राति के दिन जब भगवान सूर्य अपनी राशि परिवर्तित करते हैं, तब गलता तीर्थ में जनसैलाब उमड़ पडता है। इस दिन यहां स्नान करने से शरीर की शुद्धी और जीवन में समृद्धि और नई ऊर्जा का संचार होता है। प्राकृतिक झरनों के बीच स्नान करना एक ऐसा अनुभव देता है, जो भक्त को सीधे परमात्मा से जोड़ देता है।
मंदिर परिसर में हजारों की संख्या में बंदर रहते हैं, इसलिए इसे बंदरों वाला मंदिर भी कहते हैं। ऐसे में दर्शनार्थियों के अलावा पर्यटकों को भी यह आकर्षित करता है। परिसर में सूर्य मंदिर के अलावा प्रभु श्री राम, श्री कृष्ण और हनुमान जी के मंदिर भी हैं।
गलता जी का स्नान एक परंपरा मात्र नहीं है। यह मन, वचन और कर्म को शुद्ध करने का अनुष्ठान है। यहां की शांति और पहाड़ियों से गूंजते मंत्रोच्चार एक दिव्य लोक का अहसास कराते हैं। जयपुर की इस मिनी काशी में माघ के महीने में आना बेहद शुभ और लाभदायक माना जाता है।