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गणेश मूर्ति से जुड़ी ये गलतियां उड़ा देती है बरकत! ये है सही नियम

Ganesh ji idol right direction vastu: गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर गलत दिशा में होने से बरकत जा सकती है। ऐसे में, इस आर्टिकल में समझिए, सही दिशा, जहां गणेश जी को विराजित करना चाहिए।

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भारत

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Adarsh Thakur

Jan 07, 2026

Ganesh Ji Ki Tasveer ki Sahi Disha

Ganesh ji Idol Right Direction: गणेश जी की मूर्ति और तस्वीर किस दिशा में रखना चाहिए? (फोटोः एआई)

Ganesh ji ki Murti Kis Disha me Rakhna Chahiye: वास्तु शास्त्र के अनुसार, गलत दिशा में रखी गई गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर फायदे की जगह नुकसान करा सकती है। ऐसे में सही दिशा का ज्ञान होना बहुत जरूरी है। सही दिशा आपको बरकत, तरक्की मान-सम्मान और आर्थिक उन्नति देती है।

गलत मूर्ति और नुकसान

  • सबसे बड़ी गलती गलत सूंड वाली मूर्ति चुनना हो सकता है। घर के लिए हमेशा बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश (वाममुखी) शुभ माने जाते हैं।
  • दूसरी गलती, कभी भी गणेश जी की दो मूर्तियां एक साथ न रखें, इससे सकारात्मक ऊर्जाओं का टकराव होता है।
  • तीसरी बात, गणेश जी की पीठ घर के किसी कमरे की ओर नहीं होनी चाहिए, क्योंकि पीठ में 'दरिद्रता' का वास माना जाता है। सही दिशा उत्तर या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) मानी जाती है।
  • मूर्ति को दक्षिण दिशा में नहीं रखें और हमेशा साफ-स्वच्छ और अखंड मूर्ति ही रखें।

गणेश मूर्ति: सही दिशा और स्थान

ईशान कोण (उत्तर-पूर्व): यह सबसे पवित्र और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर दिशा मानी जाती है, जहां गणेश जी की मूर्ति रखना सबसे उत्तम है।
उत्तर दिशा: यह कुबेर की दिशा है और धन-समृद्धि के लिए शुभ होती है।
पूर्व दिशा: यह सूर्योदय और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश वाली दिशा मानी जाती है।
पश्चिम दिशा: यदि उत्तर-पूर्व या उत्तर दिशा में रखना संभव न हो, तो पश्चिम दिशा भी एक अच्छा विकल्प है।

मूर्ति स्थापना के नियम

मुख की दिशा: मूर्ति का मुख हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर हो, दक्षिण दिशा में नहीं।
अखंड मूर्ति: हमेशा पूरी और सुंदर मूर्ति स्थापित करें; खंडित मूर्ति अशुभ होती है।
एक ही मूर्ति: एक ही स्थान पर एक से अधिक गणेश प्रतिमा न रखें।
ऊंचाई: मूर्ति को जमीन पर रखने के बजाय लकड़ी की चौकी या ऊंचे आसन पर रखें।
शयनकक्ष से बचें: शयनकक्ष, गैरेज या बाथरूम के पास मूर्ति न रखें।
मुख्य द्वार: मुख्य द्वार पर लगाते समय दो मूर्तियां इस तरह लगाएं कि, उनकी पीठ आपस में जुड़ी हो।

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