रीवा

विश्वविद्यालय ने राज्यपाल के निर्देश पर किया अमल, ग्रामीणों में खुशी लहर

गांवों को विश्वविद्यालय ने लिया गोद...

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Jun 28, 2018
APSU adopt village on direction of Governor, problem will be solved

रीवा। पढऩे-पढ़ाने के साथ अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय की सक्रियता अब सामाजिक कार्यों में भी बढ़ रही है। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति यानी राज्यपाल की ओर से जारी निर्देशों के अनुरूप विश्वविद्यालय प्रशासन न केवल निकटवर्ती चार गांव व एक आंगनवाड़ी केंद्र को गोद लिया है बल्कि समस्या के निदान के लिए जल्द ही सक्रिय होगा।

स्वास्थ्य, शिक्षा व स्वच्छता की जगाएंगे अलख
राजभवन से जारी आदेश के तहत क्षेत्र के गांवों को गोद लेकर ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा व स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है। साथ ही इससे संबंधित समस्याओं को दूर करने की जिम्मेदारी भी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी। निर्देशों पर अमल करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने रीवा विकासखंड के मोहनी, सांव, सोनौरा व इटौरा गांव को गोद लिया है।

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एमएसडब्ल्यू विभाग को सौंपा जिम्मा
विश्वविद्यालय प्रशासन ने गोद लिए गए गांवों की जिम्मेदारी यूटीडी में एमएसडब्ल्यू विभाग के प्रभारी आचार्य प्रो. अंजली श्रीवास्तव को जिम्मेदारी दी है। निर्देश है कि वह सर्वप्रथम छात्र-छात्राओं के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक करें। साथ ही उन समस्यों को चिह्नित करें, जो ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बना है।

विश्वविद्यालय खर्च करना होगा बजट
गोद लिए गए सभी चार गांवों में ग्रामीणों को जागरूक करने से लेकर समस्याओं को दूर करने तक आने वाला भी खर्च विश्वविद्यालय को खुद वहन करना पड़ेगा। विभाग की ओर से इस बावत विश्वविद्यालय प्रशासन को कोई बजट नहीं दिया जाएगा। यह बात और है कि गांवों के सभी गतिविधियों की रिपोर्ट राजभवन के साथ उच्च शिक्षा विभाग को भी भेजना होगा।

कुलाधिपति से मिली अतिरिक्त जिम्मेदारी
विश्वविद्यालय को यह जिम्मेदारी कुलाधिपति से अतिरिक्त मिली है। इसके अलावा उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जिले के टीबी मरीजों को जागरूक करने की जिम्मेदारी पहले ही मिल चुकी है। इस जिम्मेदारी के तहत विश्वविद्यालय की ओर से मरीज को दवा व पोषक आहार उपलब्ध कराने के साथ ही उसे जागरूक भी करना होगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग से मदद ली जा सकेगी।

कुलपति प्रो. केएन सिंह बोले
राजभवन से मिले निर्देशों के अनुरूप गांव चिह्नित कर लिए गए हैं। एमएमडब्ल्यू विभाग को जिम्मेदारी दी गई है। गांवों में ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा व स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के साथ ही समस्याओं का हर संभव निदान करने की कोशिश की जाएगी।

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