मध्य प्रदेश में सरकार की बड़ी मुश्किल , बोले छूट नहीं मिली तो नहीं करेंगे काम लोक निर्माण विभाग के कार्यालय ठेकेदारों ने लगाया ताला
रीवा । प्रदेश में जीएसटी लागू होने के बाद ठेकेदारों को 12 प्रतिशत अधिक देना पड़ रहा है। 2017के पुराने अनुबंध में जीएसटी की छूट ठेकेदारों को नहीं दी जा रही है। इससे ठेकेदारों को दो बार टैक्स अदा करना पड़ रहा है। ठेकेदारों ने कहा कि मशीन एवं डीजल में 40 प्रतिशत राशि खर्च होती है। यह जीएसटी के बाहर है। इस तरह पहले वह डीजल एवं पेट्रोल में टैक्स देने के बाद दोबारा फिर 12 प्रतिशत जीएसटी दे रहे है। वहीं खनिज विभाग द्वारा रायल्टी की पूरी राशि काट ली जाती है लेकिन उन्हें परिवहन पास खनिज विभाग नहीं देता है। इससे उनके वाहनों पर अवैध उत्खनन व परिवहन के मामले दर्ज हो रहे हैं। इस विसंगति को दूर करने की ठेकेदारों ने मांग रखी।
सीई ऑफिस में लगाया ताला
ठेकेदारों ने बुधवार को मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग के कार्यालय में ताला जड़ दिया। इसके कारण अधिकारी-कर्मचारी कार्यालय में प्रवेश नहीं कर पाए है। इसके बाद शाम को मुख्य अभियंता ने धरना स्थल पहुंच कर ठेकेदारों की भुगतान विसंगति सहित स्थानीय मांगो को 16 अप्रैल तक पूर्ण करने का आश्वासन दिया। वहीं शासन स्तर से दूर होने वाली मांगों को उच्च अधिकारियों को अवगत कराया है। इसके बाद ठेकेदारों ने कार्यालय का ताला खोल दिया। साथ ही कहा है मांगे पूर्ण नहीं होने पर 16अप्रैल से फिर से हड़ताल की जाएगी।
16 अपैल तक दिया समय
मध्य प्रदेश संविदाकार संघ अपनी छह सूत्रीय मांगों को लेकर सिरमौर चौराहा स्थित मुख्य अभियंता लोक निर्माण कार्यालय में ताला लगा दिया। इसके बाद बाहर धरने में बैठ गए। इस दौरान कोई भी अधिकारी व कर्मचारी कार्यालय में प्रवेश नहीं कर पाया है। शाम 4बजे मुख्य अभियंता कार्यालय आए और ठेकेदारों से बात की। स्थानीय स्तर की समस्याओं के निराकरण का निर्देश दिया। वहीं जीएसटी एवं रायल्टी की समस्या को शासन स्तर के दूर कराने का आश्वासन दिया है। इसके बाद ठेकेदारों ने अपना धरना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। इस दौरान संविदाकर संघ के अध्यक्ष अशोक मिश्रा, देवेन्द्र तिवारी संरक्षक, गिरिजेश पांडेय, अमित सिंह, रामसज्जन शुक्ला, प्रमोद मिश्रा, कैलाश मिश्रा, कृष्णकांत सौहगौरा आदि उपस्थित रहे।
एक साल ही दे सकते हैं परफारमेंस-
ठेकेदारों ने कहा की 20 एमएम की बनने वाली सड़कों में परफारमेंस अवधि पहले एक साल की थी। लेकिन अब इसमें तीन साल कर दी गई है। जबकि इस सड़क निर्माण के दौरान एसओआर में अतिरिक्त प्रावधान नहीं किया गया है। इससे ठेकेदारों को काफी नुकसान हो रहा है। इसलिए 20 एमएम की डामर नवीनीकरण सड़कों पर एक साल की ही परफामरेंस गांरटी लागू करने की मांग की है।