
Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन (CJP Protest) को देशभर से समर्थन मिल रहा है। कोई स्वयं जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलन में शामिल हो रहा है, तो कई लोग दूर रहकर भी छात्रों के लिए खाने-पीने की सामग्री और अन्य आवश्यक सामान भेजकर अपना सहयोग दे रहे हैं। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से कांग्रेस नेता ने जंतर-मंतर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर बैठे बच्चों के लिए 17 हजार रुपए का खाना-पीना ऑनलाइन ऐप के माध्यम से भिजवाया।
मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के कांग्रेस नेता एवं समाजसेवी विपिन त्रिपाठी ने छात्रों के समर्थन में करीब 17 हजार रुपए की खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई है। उन्होंने लगभग 14 हजार रुपए के पिज्जा के साथ दाल-चावल, पानी की बोतलें और अन्य खाद्य सामग्री छात्रों के लिए ऑर्डर करवाई।
विपिन त्रिपाठी ने कहा कि छात्रों की आवाज को मजबूती देने के लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि चाहे परिस्थिति कैसी भी हो, हम हर समय छात्रों के समर्थन में हैं और रहेंगे। छात्र हित के लिए जो भी आवश्यक होगा, उसे करने के लिए हम हमेशा तैयार हैं। छात्र आंदोलन को विभिन्न राज्यों से मिल रहे इस तरह के सहयोग को आंदोलनकारियों के लिए मनोबल बढ़ाने वाला माना जा रहा है। दूर-दराज के लोग भी अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, पानी और अन्य आवश्यक सामग्री भेजकर छात्रों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त कर रहे हैं।
रीवा और मऊगंज से बड़ी संख्या में छात्र एवं उनके अभिभावक दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए गए हैं। इसी में शामिल मऊगंज जिले के नईगढ़ी तहसील क्षेत्र के भीर(मझगवां) गांव के निवासी अनिल सिंह भी शामिल हैं। अनिल उस समय सुर्खियों में आए जब उनके सिर पर पुलिस ने डंडे मारे और पूरा शरीर खून से लाल हो गया और वह डटकर दहाड़ते रहे। उनके बोल इस आंदोलन को धार देने वाले रहे। अनिल ने पुलिसकर्मियों से कहा कि हम शहीद हैं हर युग में जन्म लेंगे और इसी तरह आवाज बुलंद करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अंग्रेज भी ऐसा ही करते थे, उनके समय भी हमारे ही देश के सैनिक लोगों को गोलियां मारते थे और आज लाठियां बरसा रहे हैं। अनिल सिंह का यह वीडियो अब तक करोड़ों लोग देख चुके हैं और आंदोलन का वह प्रमुख चेहरा बन गए हैं।
मऊगंज के ही रिटायर्ड शिक्षक मुद्रिका प्रसाद त्रिपाठी भी छात्रों की हौसला अफजाई के लिए जंतर मंतर पहुंचे हुए हैं। उनका कहना है कि भ्रष्ट व्यवस्था के चलते ही छात्र अपनी जान दे रहे हैं। अब वक्त आ गया है कि इस पूरे सिस्टम में ही बदलाव होना चाहिए। मुद्रिका प्रसाद सामाजिक समरसता का भी संदेश दे रहे हैं और कह रहे हैं कि सरकार यह नहीं समझे की यह आंदोलन केवल बच्चों का है। इसमें पूरे देश का समर्थन है।