रीवा

सेवानिवृत्ति अवधि में बढ़ोत्तरी की भेंट चढ़ जाएगा 150 दिनों का अर्जित अवकाश, लगेगी लाखों रुपए की चपत

अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा....
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Updated: 27 Sep 2018, 12:18 PM IST
Age of retirement in Rewa's APSU increased, EC decision
Age of retirement in Rewa's APSU increased, EC decision

रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में सेवानिवृत्ति की आयु में बढ़ोत्तरी संबंधित आदेश जारी करने में हुई लेटलतीफी का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ेगा। आदेश जारी होने के बाद 31 मार्च के बाद से लेकर अब तक सेवानिवृत्ति हो चुके कर्मचारियों के सेवाकाल में दो वर्ष की बढ़ोत्तरी तो हो जाएगी, लेकिन आदेश जारी करने में हुई लेटलतीफी के चलते प्रत्येक कर्मचारी को दो से तीन लाख रुपए तक की चपत लग सकती है।

जारी आदेश 31 मार्च से होगा लागू
विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद ने सेवानिवृत्ति की आयु 60 से 62 वर्ष किए जाने की अनुमति दी है, लेकिन शर्त यह है कि 31 मार्च 2018 के बाद से सेवानिवृत्त माने जा रहे कर्मचारियों को अनुपस्थिति के बदले अर्जित अवकाश लेना होगा। गौरतलब है कि सेवानिवृत्ति की आयु में बढ़ोत्तरी से संबंधित आदेश जारी नहीं होने की स्थिति में सेवाकाल के 60 वर्ष पूरा करने वाले आठ कर्मचारियों को सेवानिवृत्त माना जा रहा था। अब इन सभी के सेवाकाल में बढ़ोत्तरी तो हो जाएगी, लेकिन अर्जित अवकाश का नुकसान उठाना पड़ेगा।

कई कर्मचारी मान लिए गए थे सेवानिवृत्त
हालांकि कार्यपरिषद ने थोड़ी सहूलियत यह जरूर दी है कि यदि कर्मचारी 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बावजूद सेवा अवधि में बढ़ोत्तरी की प्रत्याशा में सेवा देता रहा है तो विभागाध्यक्ष कर्मचारी की सेवा को मान्य कर सकते हैं। ऐसे में कर्मचारी को अर्जित अवकाश नहीं लेना होगा। फिलहाल ऐसे कर्मचारियों की संख्या नहीं के बराबर है। सेवानिवृत्ति की आयु में बढ़ोत्तरी का आदेश जारी नहीं होने की स्थिति में 60 वर्ष की आयु पूरी करने वाले ज्यादातर कर्मचारियों को सेवा से पृथक कर दिया गया था।

सेवानिवृत्ति पर उठाना पड़ेगा नुकसान
कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय बचे अर्जित अवकाश का भुगतान किया जाता है। लेटलतीफ आदेश जारी होने की स्थिति में सेवाकाल में बढ़ोत्तरी लेने वाले कर्मचारियों को कम से कम दो लाख रुपए का नुकसान उठाना पड़ेगा। समय पर आदेश जारी होता तो कर्मचारियों को यह नुकसान नहीं होता। गौरतलब है कि दो कर्मचारी अप्रैल में, एक मई में, दो जून व दो जुलाई में सेवानिवृत्त हुए हैं। ऐसे में कर्मचारी साढ़े पांच महीने से लेकर ढाई महीने तक या तो अनुपस्थित रहे या फिर उम्मीद में काम में लगे रहे।

संघ ने उठाई सेवा मान्य करने की मांग
फिलहाल कर्मचारियों को नुकसान न हो, इसके लिए कर्मचारी संघ ने मांग की है कि 31 मार्च से अब तक के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों की सेवा मान्य की जाए। क्योंकि आदेश जारी करने में हुई देरी में कर्मचारियों का कोई दोष नहीं है। देरी विश्वविद्यालय प्रशासन स्तर पर हुई है। इसलिए किसी भी स्थिति में इसका नुकसान कर्मचारियों को नहीं होना चाहिए। कर्मचारियों के आर्थिक नुकसान को विश्वविद्यालय प्रशासन ध्यान में रखे और इसके लिए समाधान का रास्ता निकाला जाए।

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27 Sep 2018, 12:18 PM IST
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