तीन दिन के बवाल के बाद झुके अधिकारी...
रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में अतिथि विद्वानों की तीसरे दिन के हंगामेदार प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने बीच का रास्ता निकाला है। संकायाध्यक्ष और विभागाध्यक्षों के साथ बैठक करने के बाद कुलपति ने अतिथि विद्वानों को बताया कि जरूरत के अनुसार विभागाध्यक्ष उन अतिथि विद्वानों को कार्य पर बुला सकते हैं। जो पिछले वर्ष अध्यापन कार्य में लगे रहे हैं। लेकिन मानदेय के मुद्दे पर कुलपति ने कहा कि इस पर वह निर्णय लेने की स्थिति में नहीं हैं। इसलिए मुद्दा कार्यपरिषद में ले जाएंगे। कार्य परिषद जो निर्णय लेती है। आगे की कवायद उसी पर कार्रवाई की जाएगी।
तीसरे दिन जारी रहा प्रदर्शन
विश्वविद्यालय में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन चले अतिथि विद्वानों के प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन दबाव में आया। दूसरी बार कुलपति ने संकायाध्यक्ष और विभागाध्यक्षों की बैठक बुलाई। बैठक के दौरान बीच का रास्ता निकालते हुए विभागाध्यक्षों ने सुझाया कि आवश्यकता को देखते हुए अतिथि विद्वानों की नियुक्ति तो की जा सकती है। लेकिन उच्च शिक्षा विभाग के निर्णय के मद्देनजर उनको न्यूनतम 30,000 रुपए का मानदेय नहीं दिया जा सकता है। यह निर्णय विश्वविद्यालय प्रशासन नहीं ले सकता है।
विभागाध्यक्षों ने दी कुलपति को सलाह
विभागाध्यक्षों ने कहा बेहतर होगा कि यह मुद्दा कार्य परिषद में ले जाया जाए। कार्य परिषद के निर्णय पर विश्वविद्यालय समन्वय समिति से सहमति प्राप्त कर अतिथि विद्वानों का मानदेय तय किया जा सकता है। बैठक में हुए इस निर्णय की कुलपति ने अतिथि विद्वानों को जानकारी दी। साथ ही कहा कि वह अपना प्रदर्शन समाप्त करें। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कोशिश होगी कि उन्हें उनकी मांग के मुताबिक मानदेय मिल सके। कुलपति के कहने पर अतिथि विद्वान धरना-प्रदर्शन समाप्त करने को तैयार तो हुए लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो वह दोबारा धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।
पूरे दिन मचा रहा घमासान
विश्वविद्यालय में लगातार तीसरे दिन अतिथि विद्वानों के धरना प्रदर्शन की चलते विश्वविद्यालय में घमासान की स्थिति बनी रही। शाम पांच बजे भले ही कुलपति के आश्वासन पर अतिथि विद्वान मान गए हों। लेकिन पूरा दिन हंगामे भरा रहा। करीब 3 बजे कुलपति ने जब संकायाध्यक्ष और विभागाध्यक्षों की बैठक बुलाई तो अतिथि विद्वान भी बैठक में शामिल होने को अड़ गए। जब विभागाध्यक्षों ने ऐतराज जताया तो अतिथि विद्वान भडक़ गए। स्थिति बिगड़ते देख कई विभागाध्यक्षों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। बाद में कुलपति ने अपने चेंबर में बैठक बुलाई तब निर्णय हो सका।
जल्द बुलाई जाएगी कार्यपरिषद की बैठक
विश्वविद्यालय प्रशासन अतिथि विद्वानों की मांग के संबंध में निर्णय लेने के लिए जल्द ही कार्य परिषद की आपातकालीन बैठक बुलाएगा। बैठक में अतिथि विद्वानों की मांग संबंधी मुद्दे को रखकर सहमति लिए जाने का प्रयास किया जाएगा।अब अतिथि विद्वानों की मांग का निर्णय कार्य परिषद के पाले में है।
भारी संख्या में तैनात रही पुलिस
धरना-प्रदर्शन के मद्देनजर तीसरे दिन भी विश्वविद्यालय में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रही। हालांकि घमासान भरे धरना-प्रदर्शन के बीच ऐसी कोई स्थिति नहीं बनी जिस पर पुलिस को बल प्रयोग करना पड़े। यह बात और रही कि अतिथि विद्वानों को समझाने में पुलिस व प्रशासन के अधिकारी भी लगे रहे।