रीवा

एमपी के इस विश्वविद्यालय में खुलेआम हो रहा भ्रष्टाचार, निर्माण से लेकर हर कार्य में मनमानी

अधिकारी बने हैं तमाशबीन....

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Jul 24, 2018
Extreme corruption in Rewa APS, ignoring rules in construction

रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में निर्माण कार्यों की व्यवस्था बेपटरी हो गई है। निर्धारित प्रक्रिया को ताक पर रख कराए गए कार्यों की गुणवत्ता पर अंगुली उठ रही है। अधिकारियों से की गई शिकायतों के मद्देनजर विश्वविद्यालय में वर्तमान में घमासान मचा हुआ है।

कार्य की गुणवत्ता पर उठ रही उंगली
विश्वविद्यालय में पिछले एक वर्ष में कराए गए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर अंगुली उठाते हुए शिकायत की गई है। शिकायतों में ज्यादातर ऐसे कार्य में शामिल हैं, जो बिना निविदा प्रक्रिया के टुकड़ों में कराए गए हैं। शिकायत विश्वविद्यालय में कार्य करने वाले संविदाकारों के बीच आपसी खींचतान का नतीजा बताया जा रहा है।

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एक कार्य को कई टुकड़ों में कराया
विश्वविद्यालय प्रशासन ने निविदा प्रक्रिया से बचने के लिए कई कार्यों को टुकड़ों में कराया है। इससे न केवल निर्माण कार्य की निर्धारित प्रक्रिया नजरअंदाज हुई बल्कि अधिकारियों के चहेते ठेकेदारों को कार्य करने का मौका मिला। नतीजा कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ ही विश्वविद्यालय की धनराशि का भी अपव्यय हुआ। अभी हाल में एमबीए विभाग में धरना प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पदाधिकारियों की ओर से भी निर्माण कार्यों को नियमों को ताक पर रखने और गुणवत्ताविहीन कार्य किए जाने का मुद्दा उठाया गया है।

patrika IMAGE CREDIT: Patrika

इन कार्यों की गुणवत्ता पर उठ रही अंगुली
शिकायतों के मद्देनजर विश्वविद्यालय में स्वर्ण जयंती पार्क, विधि भवन की पुताई, परिसर में इंटरलॉकिंग व दूरस्थ और विधि भवन के गेट व बाउंड्रीवाल के निर्माण में गुणवत्ता को दोयमदर्जे का बताया जा रहा है। शिकायत में जांच की मांग की गई है। फिलहाल इस मामले में विश्वविद्यालय का कोई भी अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है।

टुकड़ों में कार्य कराने की यह है वजह
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से टुकड़ों में कार्य कराने की मूल वजह है कि छोटे बजट में कार्य कराने का विश्वविद्यालय अधिकारियों को छूट है लेकिन बड़े बजट का कार्य कराने के लिए विवि प्रशासन को निविदा प्रक्रिया का पालन करना होता है। ऐसे में चहेते संविदाकार को निर्माण की जिम्मेदारी मिल पाने की गारंटी नहीं होती है।

अटका है कुलसचिव का वित्तीय प्रभार
विश्वविद्यालय में निर्माण कार्यों को लेकर मचे घमासान के चलते प्रभारी कुलसचिव को लाल साहब को वित्तीय अधिकार नहीं मिल पा रहा है, जबकि उन्हें कुलसचिव का कार्यभार संभाले हुए एक महीने बीतने को है। माना जा रहा है कि कुलसचिव को वित्तीय प्रभार मिलने के बाद निर्माण कार्यों के लंबित भुगतान अधर में लटक जाएंगे।

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