गुढ़ के राजकुमार के हौसले का नतीजा...
रीवा। कुछ वर्ष पहले तक मछली सप्लाई करने वाले ठेकेदार के यहां ड्राइवर की नौकरी किया करते थे। लेकिन अब न केवल खुद का व्यवसाय शुरू कर मालिक बन बैठे हैं। बल्कि दूसरों को नौकरी देने के साथ मोटी कमाई भी कर रहे हैं। बात गुढ़ निवासी राजकुमार जायसवाल की कर रहे हैं।
चार महीनों में लाखों की आमदनी
मछली पालन से जुड़े लोगों को बीज (फ्राई) उपलब्ध कराने की योजना बनाते हुए राजकुमार ने कुछ वर्ष पहले गुढ़ में एक नर्सरी से शुरुआत की। शुरू में कुछ कठिनाई तो आई, लेकिन वह लगे रहे। नतीजा उनके पास अब फ्राई तैयार करने के लिए कुल चार नर्सरी है। जिससे उन्हें महज चार महीने में लाखों रुपए की आमदनी हो जाती है।
राजकुमार चार तालाबों में कर रहे उत्पादन
राजकुमार बताते हैं कि वह मैहर में स्थित मत्स्य विभाग के शासकीय पोड़ी फॉर्म से स्पॉन (मछली के अंडे) लाते हैं। गुढ़ में उनके द्वारा बनाए गए चार छोटे तालाबों में डालकर उन्हें बीज (फ्राई) के रूप में तैयार करते हैं। जिसे मत्स्य पालन का व्यवसाय करने वाले अच्छी कीमत पर खरीद लेते हैं। राजकुमार के मुताबिक ३२ लाख स्पॉन से उन्हें न्यूनतम आठ लाख फ्राई प्राप्त होती है।
चार महीने का व्यवसाय, दो गुना मुनाफा
जुलाई से लेकर अक्टूबर तक चार महीने के इस व्यवसाय में राजकुमार दो बार नर्सरी तैयार करते हैं। जिससे उन्हें दोनों बार लागत की तुलना में दोगुना मुनाफा होता है। बाकी के बचे महीनों में वह नर्सरी में छूटे फ्राई से तैयार हुई मछलियों को बाजार में बेंच कर आमदनी करते हैं। साथ ही पूरे वर्ष भर दो से तीन लोगों को रोजगार भी देते हैं। दो बार नर्सरी लगाने में वह सवा लाख रुपए तक की पूंजी लगाते हैं और न्यूनतम ढाई लाख रुपए की आमदनी करते हैं।
ऐसे समझिए एक बार में लागत व मुनाफा
नर्सरी डालने में लागत
40 हजार रुपए मछली के स्पॉन पर खर्च
15 रुपए फ्राई के राशन सरसों के खली में
10 हजार रुपए लेबर सहित अन्य खर्च
फ्राई से होने वाला मुनाफा
40 हजार रुपए चार लाख रेहू किस्म के फ्राई से आमदनी
95 हजार रुपए चार लाख कतला किस्म के फ्राई से आमदनी