पुराने रेगुलेशन के मुताबिक ही होगा प्रवेश...
रीवा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से जारी नई अधिसूचना भी एलायड विषय के छात्रों को पीएचडी की प्रवेश प्रक्रिया में शामिल कराने के लिए नाकाफी साबित हो रही है। विश्वविद्यालय अधिकारी पूर्व की भांति ही यूजीसी के 2016 के रेगुलेशन के तहत प्रवेश लेने की बात कर रहे हैं, जबकि संबंधित विषय के लोगों का तर्क है कि नई अधिसूचना एलायड विषय को पीएचडी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए पात्र मानती है।
अधिसूचना को बता रहे असिस्टेंट प्रोफेसर से संबंधित
विश्वविद्यालय में मंगलवार को यूजीसी की नई अधिसूचना को लेकर अधिकारियों के बीच विचार विमर्श किया गया। वर्तमान में चल रही पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया के मद्देनजर चर्चा में विश्वविद्यालय अधिकारियों ने माना कि यूजीसी की नई अधिसूचना असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति से संबंधित है। विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति के बावत एलायड के छात्र संबंधित मूल विषय के लिए पात्र माने जाएंगे। उदाहरण स्वरूप बायोटेक्नोलॉजी के छात्र जीवविज्ञान विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए पात्र होंगे, इसी प्रकार दूसरे एलायड विषय के छात्र भी मूल विषय के लिए पात्र माने जाएंगे।
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प्रवेश प्रक्रिया 2016 रेगुलेशन के तहत होगी पूरी
एलायड के छात्र मूल विषय के प्रोफेसर के निर्देशन में शोध कर सकेंगे, विश्वविद्यालय अधिकारियों ने इस बात से साफ तौर पर इंकार किया है। उनका तर्क है कि नई अधिसूचना में इस तरह की कोई बात नहीं है। अधिकारियों ने तर्क दिया कि यूजीसी से इस संबंध में चर्चा की गई है। वहां से भी निर्देश मिला है कि पीएचडी में प्रवेश प्रक्रिया 2016 रेगुलेशन के तहत ही पूरी की जाएगी। अधिकारियों का भी तर्क है कि विश्वविद्यालय समन्वय समिति के निर्देशानुसार ही प्रवेश प्रक्रिया पूरी कराई जा सकती है। बिना समिति के निर्देश के कोई भी बदलाव संभव नहीं है।
पक्ष में विश्वविद्यालय विशेषज्ञों का यह है तर्क
विश्वविद्यालय के ही विशेषज्ञों का तर्क है कि जब एलायड विषय के छात्रों को मूल विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए पात्र मान लिया गया है तो यह स्वत: स्पष्ट हो जाता है कि एलायड के छात्र मूल विषय के प्राध्यापकों के निर्देश में शोध कर सकेंगे। ऐसा नहीं होने पर यूजीसी के नए रेगुलेशन का विरोधाभास होगा, क्योंकि एक ओर जहां एलायड के छात्र मूल विषय के प्रोफेसर बन सकेंगे। वहीं दूसरी ओर से एलायड विषय के छात्रों को मूल विषय के प्रोफेसर के निर्देशन में शोध करने से वंचित रखा जाएगा।
यह है यूजीसी का 2016 का रेगुलेशन
यूजीसी के 2016 के रेगुलेशन के तहत स्नातकोत्तर उत्तीर्ण छात्र उसी प्रोफेसर के निर्देशन में शोध कर सकेगा, जिस विषय का वह छात्र है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसी नियम का हवाला देते हुए एलायड विषय के छात्रों को पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में शामिल नहीं किया है। तर्क है कि विश्वविद्यालय व महाविद्यालय में एलायड विषय के प्राध्यापकों के अधीन शोध के लिए सीट ही खाली नहीं है। गौरतलब है कि इससे पहले एलायड विषय के छात्र मूल विषय के प्रोफेसर के निर्देशन में शोध करते रहे हैं।