सरकार की योजना के सत्यापन के दौरान संभाग में रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली में दो लाख से अधिक आवेदन अस्वीकार
रीवा. सरकार ने हजारों श्रमिकों को आयकर दाता बताकर संबल योजना से बाहर कर दिया है। ये ऐसे दिहाड़ी मजदूर हैं, जो आस-पास के गांवों में मजदूरी कर परिवार का पेट पाल रहे हैं। हैरान करने वाली बात है कि जिन मजदूरों को आयकर क्या है ये भी नहीं मालूम, उन्हें आयकरदाता की लिस्ट में डालकर आवेदन अस्वीकार कर दिया गया है।
बरांव पंचायत में 400 से अधिक श्रमिकों का पंजीयन
जिला मुख्यालय से सवा सौ किमी दूर बरांव पंचायत में 400 से अधिक मजदूरों का पंजीयन किया गया है। इसमें 100 से अधिक महिला और पुरुष श्रमिकों को आयकरदाता बताया गया है। जनपद पंचायत से सत्यापन के बाद ऑनलाइन लिस्ट जारी हुई तो पंचायत सचिव की ओर से जिन श्रमिकों के नियोजन के कॉलम में मजदूर बताया गया है, उन्हें सत्यापन के दौरान आयकरदाता बताकर रिजेक्ट कर दिया गया है।
पंचायत अमले ने दी अफसरों को सूचना
पंचायत अमले ने इसकी सूचना आला अफसरों को दी है। बरांव गांव के सुखलाल कोल ने बताया कि वह मजदूरी करता है, आयकर क्या है, उसे पता ही नहीं है। लेकिन, सत्यापन के दौरान जनपद सीइओ कार्यालय में ऐसे श्रमिकों को आयकरदाता बताकर आवेदन रिजेक्ट कर दिया है। ये कहानी अकेले सुखलाल की नहीं है, बल्कि इस लिस्ट में गांव के जगजीवन कोल, शिवनंदन साकेत, सुनीता साहू, चिड्डी साहू, श्यामकली साकेत सहित क्षेत्र के सैकड़ों श्रमिकों को आयकरदाता बताकर लिस्ट से बाहर कर दिया गया है। इसके अलावा एक हेक्टेयर से कम खेतिहर मजदूरों के भी पंजीयन अमान्य कर दिए गए हैं।
संबल में संभाग में दो लाख से ज्यादा आवेदन अस्वीकार
मध्य प्रदेश जनकल्याण पोर्टल के अनुसार, रीवा संभाग में 61 लाख से अधिक आवेदन आए हैं। पंचायत स्तर पर श्रमिकों और खेतिहर मजदूरों के आवेदन ऑनलाइन कर दिए गए हैं। सत्यापन के दौरान संभाग में अब तक दो लाख से अधिक आवेदन अमान्य कर दिए गए हैं। रीवा में 68,484 पंजीयन रिजेक्ट किए गए हैं। इसी तरह सतना में 44,892 सीधी में 19,984 और सिंगरौली में 61,110 आवेदन आयकरदाता सहित विभिन्न कारण बताकर अस्वीकार कर दिए गए हैं।
ऐसे समझें प्रक्रिया
पंजीयन के आवेदन की ऑनलाइन एंट्री पंचायत सचिव करता है। इसका सत्यापन जनपद पंचायत की लॉगिन से होता है। सत्यापन के बाद भोपाल से मध्य प्रदेश जनकल्याण पोर्टल पर फाइनल लिस्ट जारी कर दी जाती है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
ऑनलाइन लिस्ट में आयकरदाता कैसे हो गया, यह मैं खुद नहीं समझ पा रहा हूं। इस संबंध में जनपद और जिला पंचायत कार्यालय से संपर्क किया है। अधिकारियों ने सुधार कराने का आश्वासन दिया है।
रामधनी मिश्र, सचिव, पंचायत बरांव
वर्जन...
ऐसी सूचना नहीं है, सत्यापन के दौरान अगर इस तरह की गड़बड़ी हुई है तो उसे सुधार किया जाएगा। मजदूर आयकरदाता नहीं हो सकता। किसी कारण से रिजेक्ट हो गया है तो, उसका दोबारा सत्यापन कराए जाने की व्यवस्था है।
हरिशचंद्र द्विवेदी, सीइओ, जनपद हनुमना