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राज्य खाद्य आयोग की टीम के जाते ही मध्याह्न भोजन का मेन्यू दरकिनार

ढाई करोड़ कीमत का गेहूं-चावल खर्च, केंद्रीयकृत रसोइघर के संचालक की मनमानी पर जिम्मेदारों का पर्दा
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रीवा

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Rajesh Patel

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Updated: 28 Jul 2018, 1:33 PM IST

Mid-day meal by the State Food Commission team

Mid-day meal by the State Food Commission team

रीवा. राज्य खाद्य आयोग के सदस्यों के जाने के दूसरे दिन ही मध्याह्न भोजन व्यवस्था बेपटरी हो गई है। भोजन पकाने वाली संस्थाएं मेन्यू को दरकिनार कर बच्चों को भोजन परोस रही हैं। जिले में अप्रैल से लेकर अब तक ढाई करोड़ रुपए से ज्यादा के गेहूं-चावल की आपूर्ति की गई। इसके अलावा मध्याह्न भोजन पकाकर परोसने के लिए लाखों रुपए खर्च किए गए। बावजूद इसके बच्चों को मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा है।

दोयम दर्जे का भोजन परोस रहा किचेन संचालक

शहरी क्षेत्र के बच्चों के लिए शुक्रवार को शासन ने खिचड़ी, आलू, मटर व टमाटर की सब्जी देने का मेन्यू शासन ने निर्धारित किया है लेकिन केंद्रीकृत रसोइघर के संचालक ने दोयम दर्जे की खिचड़ी और पानीदार सब्जी देकर इतिश्री कर ली। बच्चों ने बताया कि सब्जी में टमाटर और मटर की मात्रा नाम मात्र की रही। शहरी क्षेत्र के बच्चों को रोटी की जगह अधिकतर दिन चावल दिया जा रहा है। चार दिन पहले राज्य स्तरीय खाद्य आयोग की टीम ने केंद्रीकृत रसोइघर में रोटियां भी बनवाई थी।

थाली में मटर और टमाटर नाममात्र का डाला गया

टीम के लौटते ही ‘पत्रिका’ टीम ने शुक्रवार दोपहर डेढ़ बजे कलामंदिर परिसर के बगल स्थित नगर निगम शासकीय स्कूल में पड़ताल की तो बच्चों की थाली में खिचड़ी, पानीदार आलू की सब्जी दी गई थी। कुछ थाली में मटर और टमाटर नाममात्र का डाला गया था। आलू की मात्रा अधिक रही। ये कहानी अकेले इस विद्यालय की नहीं, बल्कि ज्यादातर विद्यालयों की रही। शहरी क्षेत्र में शिक्षा विभाग और किचेन संचालक की सांठगांठ से 8 हजार से अधिक बच्चों को भोजन दिए जाने की व्यवस्था की जा रही है। इसी तरह आंगनबाड़ी में दूध, दाल सहित अन्य भोजन की व्यवस्था में नियम-कायदे की अनदेखी की जा रही है। आयोग के सदस्यों के सामने परिवहन के लिए अच्छे वाहन का दावा किया गया, टीम के जाते ही विद्यालयों में ऑटो टैक्सी के जरिए भोजन का परिवहन किया जा रहा है।

अप्रैल से लेकर जुलाई तक 11 हजार क्विंटल का आवंटन

नागरिक आपूर्ति निगम के आंकड़े के अनुसार, अप्रैल 2017 से लेकर जुलाई 2018 तक बच्चों को मध्याह्न भोजन देने के लिए 11 हजार क्विंटल से अधिक खाद्यान्न का आवंटन किया गया है। 2200 रुपए प्रति क्विंटल का औसत लिया जाए तो ढाई करोड़ रुपए से ज्यादा का गेहूं और चावल दिया गया है। नान कार्यालय के अनुसार मध्याह्न भोजन के लिए अप्रैल में माध्यामिक स्कूल के लिए 1866.29 क्विंटल और प्राइमरी के लिए 1663 क्विंटल गेहूं और चावल दिया गया है। जून में दोनों को मिलाकर 2316.23 क्विंटल गेहूं और चावल दिया गया है। जुलाई के लिए 4141.19 क्विंटल गेहूं और चावल का आवंटन दिया गया है। जिसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालय शामिल हैं। खाद्यान्न के अलावा भोजन बनाने वाली संस्थाओं को हर माह लाखों रुपए नगद का भुगतान किया जा रहा है।