रीवा

रत्ना के हौसलों के आगे हारी सरकार, अब हैं नायब तहसीलदार

सरकार ने कम उम्र बताकर नियुक्ति रोक दी। इसके बाद वे हाईकोर्ट गई और कोर्ट के आदेश पर सरकार को झुकना पड़ा और उनकी परीक्षा कराई।
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Updated: 8 Mar 2018, 1:46 PM IST
lost government behind Ratna's fame, now is Naib Tehsildar
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रीवा. रत्ना के हौसलों के आगे सरकार हार गई और अब वे रीवा जिले के मनगवां तहसील में नायब तहसीलदार के पद पर पदस्थ रहकर जनसेवक का दायित्व बाखूबी निभा रहीं हैं। जब पति ने उनको तलाक दिया तो उनकी दुनिया में अंधेरा छा गया था। उनको सूझ नहीं रहा था कि क्या करें और दो बच्चों को कैसे पालें। लेकिन वे जिंदगी से हारी नहीं बल्कि हिम्मत से काम लिया और अपनी पढ़ाई का उपयोग करते हुए सबसे पहले कोचिंग पढ़ाना शुरू किया। कोचिंग करके बच्चों को पालने के साथ ही पीएससी की तैयारी शुरू की। दिन में कोचिंग पढ़ाती और रात में तैयारी करतीं। उनकी लगन एवं मेहनत रंग लाई और अच्छे नंबरों से पीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण कर लिया।


मूल रूप से मैहर की रहने वाली रत्नराशि का पति से 1997 में तलाक हो गया था। इसके बाद वे रीवा आ गईं और अनंतपुर में रहकर पहले डेयरी चलाया और इसके बाद कोचिंग करके पीएससी की तैयारी की। वर्ष 2008 में उन्होंने पीएससी का प्री एग्जाम दिया इसके बाद 2012 में रिजल्ट आया तो सरकार ने कम उम्र बताकर नियुक्ति रोक दी। इसके बाद वे हाईकोर्ट गई और कोर्ट के आदेश पर सरकार को झुकना पड़ा और उनकी परीक्षा कराई। वर्ष 2012 में उन्होंने एपीपीएसी परीक्षा पास की और नायब तहसीदार के पद उनका चयन हुआ। 9 दिसंबर 2016 को उन्होंने रीवा हुजूर तहसील में बतौर नायब तहसीलदार के पद पर ज्वाइन किया। वर्तमान में मनगवां तहसील के डेल्ही सर्किल में पदस्थ हैं।


बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान
पति से अलग होने के बाद उन्होंने न केवल खुद अच्छा मुकाम हासिल किया बल्कि अब अपने बेटी दामिनी गौतम और दो बेटों को भी अच्छी शिक्षा दिलवा रहीं हैं। 1997 में पति से तलाक के बाद वह कुछ दिन तक माता-पिता के साथ घर पर रहीं। रत्नाराशि ने बताया कि हौसले बुलंद हों और इरादे नेक हों तो आप की कभी हार नहीं हो सकती।

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