टॉयलेट तक की व्यवस्था नहीं...
रीवा। भले सरकार शौचालय निर्माण का ढिंढोरा पीट रही हों पर यह जानकार आप आश्चर्यचकित होंगे कि शासकीय वेंकट संस्कृत महाविद्यालय में एक भी शौचालय नहीं है। यह बात खुद महाविद्यालय प्रशासन स्वीकार कर रहा है। शनिवार को जनभागीदारी समिति की बैठक में यह मुद्दा उठा तो सदस्य भी भौचक रह गए।
सदस्य बोले, जल्द होनी चाहिए व्यवस्था
रहा। जिसका प्रस्ताव समिति ने सर्वसम्मति से पारित करते हुए मामले को शासन-प्रशासन से अवगत कराने का निर्णय लिया है ताकि यहां अध्ययनरत 40 छात्रों को शौचालय की सुविधा मुहैया कराई जा सके। जानकारों की माने तो बीते वर्ष जनभागीदारी समिति की बैठक में ही संासद जनार्दन मिश्रा ने शौचालय निर्माण की बात कही थी। लेकिन वे समय के साथ अपना वादा भूल गए।
भूमि रिकॉर्ड में शामिल नहीं महाविद्यालय
जनभागीदारी समिति में इसके अलावा सडक़ और अतिक्रमण का मुद्दा भी उठाया गया। बताया गया कि महाविद्यालय को भूमि रिकार्ड में लाने के लिए कलेक्टर कार्यालय में दर्जनों आवेदन दिए गए लेकिन अभी तक भूमि रिकार्ड में संस्कृत महाविद्यालय शामिल नहीं हो सका है। अतिक्रमण के चलते महाविद्यालय की जमीन भी सुरक्षित नहीं है। इसे हटाने की कार्रवाई के लिए समिति लिखेगी।
कॉलेज के लिए खरीदा जाएगा फर्नीचर
समिति ने बैठक महाविद्यालय का बजट 23 हजार रुपए है। जिससे फर्नीचर खरीदने का निर्णय लिया गया है। बैठक में अध्यक्ष एड. अनिल पाण्डेय, प्राचार्य डॉ. वीपी मिश्रा, जनभा प्रभारी डॉ. एके पाण्डेय, वरिष्ठ प्राध्यापक कल्पना तिवारी, नीलिमा मिश्रा, डॉ. पीसी पाण्डेय, बीके माला, अनुराग मिश्र सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
सुरक्षित लाइबे्ररी की दरकार
बीते वर्ष आई बाढ़ के दौरान यहां पुस्तकालय में पानी भरने से किताबें नष्ट हो गई थी। जिसके सापेक्ष 50 हजार रुपए की किताबें आई हैं। लेकिन इस बार भी बाढ़ की आशंका का भय है। जिसके चलते एक सुरक्षित स्थान तय नहीं हो पाया है। समिति के सदस्यों ने इस पर मंथन किया है।