
Rewa News :मध्य प्रदेश के रीवा मेडिकल कॉलेज के गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल में प्रसव के दौरान महिला और उसके नवजात की मौत पर उपचार में लापरवाही के आरोपों का मामला सीएम हाउस तक पहुंच गया है। पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की गई है। मृतिका के परिजनों के धरना के बावजूद कार्रवाई को लेकर हीलाहवाली कर रहे मेडिकल कॉलेज के डीन ने अवकाश के दिन दो ड्यूटी डॉक्टर्स को निलंबित करने का आदेश जारी किया है। ड्यूटी पर तैनात स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सोनल अग्रवाल एवं निश्चेतना विभाग की डॉ. निधि पांडेय को तत्काल निलंबित कर दिया गया है।
इस प्रकरण में मेडिकल कॉलेज की उपचार प्रबंधन व्यवस्था सवालों में घिर गई है। जिस तरह से प्रसव के लिए आई महिला के उपचार में शुरुआत से ही लापरवाही बरती गई और ऑपरेशन थियेटर से बाहर निकलकर प्रसूता कल्पना मिश्रा निवासी हटवा (बैकुंठपुर) के चिल्लाने का वीडियो वायरल हुआ है, उससे अस्पताल प्रबंधन सवालों के घेरे में है। सोशल मीडिया पर इस घटना को लोग तेजी से वायरल कर रहे हैं। जिसकी वजह से मामला सीएम हाउस तक पहुंच गया है, जहां से पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब कर ली गई है। स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव ने भी मेडिकल कॉलेज के डीन से जानकारी ली है और लापरवाही पर फटकार भी लगाई है।
मामले को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस ने सवाल उठाए। प्रदेश कांग्रेस के एक्स हैंडल पर वीडियो शेयर करते हुए पोस्ट किया गया कि, 'प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जो उप मुख्यमंत्री भी है, उनके गृह नगर रीवा में एक गर्भवती महिला की बच्चे सहित मौत हो जाती है! मृतका का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें महिला मदद मांगती दिख रही है और कह रही है, यह लोग मुझे मार देंगे! भाजपा के राज में अस्पतालों में इलाज से अधिक दर्द मिल रहा है! इस असंवेदनशील सरकार में रोज कोई आम आदमी जिंदगी भर का दर्द पा रहा है! भाजपा सरकार को इस परिवार के दर्द का जवाब देना ही होगा!
प्रसूता कल्पना मिश्रा और नवजात की मौत के बाद भोपाल से जांच टीम गठित की गई है। इसमें रीवा से किसी भी डॉक्टर या अधिकारी को शामिल नहीं किया गया है। यह टीम कभी भी आकस्मिक रूप से रीवा पहुंचेगी। इसके पहले मेडिकल कॉलेज के डीन की ओर से गठित पांच सदस्यीय जांच दल डॉ. शशि जैन, डॉ. प्रियंक शर्मा, डॉ. अवतार सिंह, डॉ. पद्मा शुक्ला एवं उर्मिला समझदार आदि को पूरे प्रकरण की जांच करना था। प्रमुख सचिव की फटकार के बाद डीन ने जांच टीम के सदस्यों से फिलहाल जांच प्रक्रिया प्रारंभ नहीं करने को कहा है। अब पूरे मामले की जांच भोपाल की टीम ही करेगी।
उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने प्रसूता एवं उनके गर्भस्थ शिशु की मृत्यु के प्रकरण में कहा है कि निष्पक्ष जांच होगी। उन्होंने कहा है कि मरीजों एवं उनके परिजनों के साथ संवेदनशील एवं सम्मानजनक व्यवहार और निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस पर मृतिका के परिजनों ने कहा है कि जिस समय वह न्याय की गुहार लगा रहे थे, उप मुख्यमंत्री मेडिकल कॉलेज परिसर में ही थी। पूरे दिन उनकी ओर से कोई निर्देश नहीं दिए गए, इसलिए अधिकारी जांच में लीपापोती कर रहे थे।
संजयगांधी अस्पताल के संयुक्त संचालक डॉ. राहुल मिश्रा की ओर से मेडिकल स्टेटस बताया गया है। जिसमें उन्होंने कहा कि कल्पना मिश्रा पति अमित मिश्रा निवासी ग्राम हटवा को गांधी स्मारक चिकित्सालय के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में 25 अगस्त की देर रात भर्ती कराया गया था। अगले दिन उपचार के दौरान रात 11.55 बजे उनकी एवं उनके गर्भस्थ शिशु की मृत्यु हो गई। चिकित्सकीय अभिलेखों के अनुसार, भर्ती के समय मरीज का प्लेटलेट काउंट लगभग 30 हजार प्रति माइक्रोलिटर था। रक्तचाप अत्यधिक बढ़ा तथा लीवर एंजाइम भी बढ़े हुए पाए गए थे। मरीज को निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार एवं आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रियाएं प्रारंभ की गई थीं। चिकित्सकीय जांच के आधार पर मरीज में टर्म प्रेग्नेंसी के साथ गंभीर प्री-एक्लेम्पसिया, गंभीर थ्रोम्बोसाइटोपीनिया एवं हेल्प सिंड्रोम का निदान किया गया था।
जच्चा-बच्चा की मौत के बाद परिजनों का सीधा आरोप ड्यूटी डॉक्टर्स पर था। इसके बावजूद प्रथम दृष्टया दो नर्सों को निलंबित किया गया। जिस पर नर्सिंग एसोसिएशन ने नाराजगी जाहिर की है। एसोसिएशन की प्रमुख अंबिका तिवारी ने बताया कि हर घटनाक्रम में नर्सों को सहज मानकर कार्रवाई की जाती है। इसलिए शनिवार को एसोसिएशन की बैठक बुलाई गई है, उसमें मांगों के बिंदु तय किए जाएंगे।
मामले में कांग्रेस भी हमलावर है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में स्वास्थ्य की बुनियादी सुविधाएं ध्वस्त हैं। मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए और जच्चा-बच्चा की मौत के दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।