रीवा

कमीशन के फेर में फंसा युवाओं का रोजगार, शासन की योजनाओं का नहीं मिल रहा लाभ

पूरा नहीं हो पा रहा सपना...
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Sep 30, 2018
MP CM's self-employment schemes in Rewa no benefit youth
MP CM's self-employment schemes in Rewa no benefit youth

रीवा। पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार नहीं मिलने की स्थिति में युवाओं को बेरोजगारी का दंश नहीं झेलना पड़े। कुछ ऐसी ही मंशा के साथ शासन स्तर से भले ही युवाओं के स्वरोजगार के लिए अनुदान की तमाम योजनाएं शुरू की गई हो, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता और कार्यालयों में कमीशनखोरी के चलते उनके सपने अधूरे रह जा रहे हैं। स्वरोजगार उपलब्ध कराने वाले सरकारी कार्यालयों में डंप प्रस्ताव इसी का नतीजा है।

ज्यादातर प्रस्ताव में कार्यालयों में रह जाते हैं डंप
युवाओं की ओर से स्वरोजगार से संबंधित योजनाओं के जरिए अनुदान प्राप्त करने के बावत आवेदन तो हजारों की संख्या में आते हैं, लेकिन स्वीकृत प्रस्तावों की संख्या इकाई के अंक में सीमित होती है। ज्यादातर प्रस्ताव पहले उद्योग विभाग के कार्यालयों में डंप होकर रह जाते हैं। जिनको उद्योग विभाग से हरी झंडी मिली भी तो वह बैंकों में औपचारिकता पूरी नहीं होने के बहाने से अस्वीकृत हो जाते हैं। योजनाओं से वंचित होने के भय से खुलकर भले ही आवेदक बोलने को तैयार नहीं हों, लेकिन वह यह बात स्वीकार करने से नहीं कतराते हैं कि बिना कमीशन दिए प्रस्ताव की स्वीकृत मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।

10 हजार से अधिक आवेदन विभिन्न विभागों में डंप
स्वरोजगार योजना के जरिए अनुदान उपलब्ध कराने वाले जिले के सभी सात विभागों में 10 हजार से अधिक आवेदन डंप हैं। जबकि स्वीकृत आवेदनों की संख्या नहीं के बराबर है। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के स्वीकृत प्रस्तावों की नहीं के बराबर संख्या उदाहरण के तौर पर लिया जा सकता है। केंद्र की ओर से मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में 600 लक्ष्य के सापेक्ष के 90 प्रस्ताव स्वीकृत हैं। जबकि मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना में 288 लक्ष्य के सापेक्ष एक भी प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हैं। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना में भी एक भी प्रस्ताव स्वीकृत नहीं है। जबकि लक्ष्य 40 का है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना में 40 लक्ष्य के सापेक्ष केवल दो प्रस्ताव स्वीकृत हैं।

युवाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराने वाले विभाग
युवाओं को कुल सात विभाग मिलकर स्वरोजगार उपलब्ध कराने का कार्य कर रहे हैं। इन सात विभागों में जिला व्यापार एवं उद्योग विभाग, पिछड़ा, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, खादी ग्रामोद्योग आयोग, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड, शहरी विकास अधिकरण, आदिम जाति कल्याण विभाग व जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति शामिल हैं।

Updated on:
30 Sept 2018 12:35 pm
Published on:
30 Sept 2018 12:35 pm