रीवा

कैंसर केसेज ने चौंकाया, इस शहर में 10 साल में मिले 5 हजार से ज्यादा मरीज, ये लक्षण दिखें तो न करें देर

MP News Cancer Cases Increased: मध्य प्रदेश के विंध्य में दस साल में मिसे 5 हजार से ज्यादा मरीज, संजय गांधी अस्पताल में कैंसर की पुष्टि, आंकड़ा चौंकाने वाला...

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Mar 30, 2026
MP News Cancer Danger Increased (photo:freepik)

MP News Cancer Cases Increased: एमपी के रीवा जिले के संजय गांधी अस्पताल के कैंसर वार्ड में बीते 10 वर्षों में 5116 मरीजों की जांच में कैंसर की पुष्टि हुई है। इनमें से 4885 मरीजों ने अस्पताल के कैंसर वार्ड में भर्ती होकर उपचार कराया, जबकि शेष 231 मरीज अन्य अस्पतालों में इलाज कराने चले गए। आंकड़ा केवल उन मरीजों का है, जो संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में पहुंचे।

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इलाज के लिए अन्य शहरों का रुख करते हैं मरीज

वास्तविकता में एमपी के विंध्य में कैंसर मरीजों की संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि कई मरीज जांच और उपचार के लिए अन्य शहरों का रुख करते हैं। गौरतलब है कि लगभग 25 वर्ष पहले अस्पताल की स्थापना के साथ ही यहां कैंसर वार्ड मौजूद था। हालांकि, शुरुआत में मरीजों के उपचार के लिए पर्याप्त चिकित्सक और स्टाफ उपलफध नहीं थे। वर्ष 2014 के बाद विभाग में एक सहायक प्राध्यापक और कुछ स्टाफ की नियुक्ति हुई, जिसके बाद कैंसर मरीजों के लिए ओपीडी शुरू हुई और उन्हें भर्ती कर उपचार देने की प्रक्रिया भी शुरू हुई। वर्तमान में भी विभाग में चिकित्सकों और स्टाफ की कमी बनी हुई है, जिसके चलते मशीनरी का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।

ओरल कैंसर के सबसे ज्यादा मरीज

डॉ. मार्को के अनुसार, विंध्य क्षेत्र में सबसे अधिक मरीज ओरल कैंसर के हैं। इस प्रकार के कैंसर में पुरुषों के साथ महिलाओं की संख्या भी शामिल है। यह कैंसर मुंख्यत: बीड़ी, गुटखा और तंबाकू के अत्यधिक सेवन से होता है। उन्होंने यह भी बताया कि अन्य कैंसर जैसे ब्रेस्ट कैंसर, ओवरी कैंसर और सर्वाइकल कैंसर बिगड़ती जीवनशैली के कारण बढ़ रहे हैं। अत्यधिक फास्ट फूड या बाहर के भोजन से मोटापा बढ़ता है, एस्ट्रोजन स्तर में वृद्धि होती है, जो कैंसर का कारण बन सकती है।

5 साल तक चलता है इलाज

रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अजीत मार्को ने बताया कि अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों का उपचार लगभग 5 वर्षों तक चलता है और इस दौरान नियमित फॉलोअप भी किया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि मरीज चिकित्सकीय निर्देशों का पालन करते हुए जीवनशैली अपनाएं और समय-समय पर उपचार लेते रहें, तो कैंसर के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है। वर्तमान में वार्ड में कीमोथेरेपी और टारगेट थेरेपी उपलब्ध है।

तीसरी-चौथी स्टेज में पहुंचते हैं मरीज, वरना समय पर मिल सकता है इलाज

डॉक्टर्स का कहना है कि विंध्य में आने वाले ज्यादातर मरीज तीसरी-चौथी स्टेज में यहां पहुंचते हैं। तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। इस स्टेज के कैंसर में इलाज देना मुश्किल हो जाता है। मरीज की जान पर बन सकती है।

हालांकि ऐसा नहीं है कि सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं नहीं हैं, लेकिन दवाओं में, जांच में और बार-बार किसी अस्पताल में आने-जाने में लगने वाला खर्च हजारों रुपए का हो जाता है। इससे भी ग्रामीण बचते हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में जागरुकता और स्क्रीनिंग में कमी जैसे बड़े कारण हैं कि कैंसर मरीज शुरुआत में ही जांच नहीं करा पाते और मामला तीसरी-चौथी स्टेज तक पहुंतच जाता है। ज्यादा हालात खराब होने के बाद मरीज अस्पताल पहुंचते हैं। अगर ग्रामीण अपनी हेल्थ को लेकर अवेयर रहें और अस्पतालों की ओर से समय-समय पर स्क्रीनिंग की व्यवस्था की जाए तो कैंसर मरीज की जान के जोखिम को कम किया जा सकता है।

कैंसर के लक्षण (Cancer Symptoms)

  • अचानक वजन कम होना
  • लगातार थकान, कमजोरी
  • शरीर के किसी भी हिस्से में गांठ खासतौर पर बगल में, गर्दन में, स्तन पर या अन्य किसी भी अंग में कठोर और बिना दर्द वाली पत्थर जैसी आकृति
  • त्वचा के रंग में, आकार में बदलाव नजर आना
  • किसी भी घाव का लंबे समय तक न भरना
  • शरीर के किसी भी हिस्से में लगातार दर्द की शिकायत
  • खांसी में खून, पेशाब या शौच में खून
  • महिलाओं में असामान्य रक्तस्राव
  • पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियां जैसे पेट फूलना, भारीपन लगना,
  • लंबे समय तक दस्त रहना या कब्ज की समस्या
  • निगलने में कठिनाई
  • लगातार बुखार या पसीना आना खास तौर पर रात में
  • शरीर पर नए तिल उगना

मुंह के कैंसर के लक्षण (Oral Cancer Symptoms)

  • मुंह में लगातार छाले बने रहना या घाव होना
  • मुंह में जीभ, गालों या मसूड़ों पर लाल या सफेद पैच या धब्बे होना
  • मुंह में या गर्दन में गांठ या सूजन
  • खाना खाते समय चबाने में, निगलने में तकलीफ होना
  • आवाज में बदलाव होना, कर्कशता आना
  • दांतों में बिना किसी वजह का ढीलापन आना, नये दांत का एडजस्ट न होना
  • होंठ, मुंह, गले में दर्द या सुन्नपन रहना
  • मुंह के किसी ङी हिस्से से लगातार खून बहना
  • बिना किसी वजह से वजन कम होना

डॉ. अजीत मार्कों कहते हैं कि ये कैंसर के सामान्य लक्षण जरूर हैं, लेकिन कई बार ये लक्षण अन्य बीमारियों के भी होते हैं। ऐसे में इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं, घर पर रहकर इनका निदान न खोजें।

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Published on:
30 Mar 2026 12:40 pm
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