नोटबंदी व जीएसटी से बाजार में आर्थिक मंदी, अभी तक नहीं संभले
रीवा। पहले नोटबंदी फिर जीएसटी से गिरा बाजार अभी तक नहीं उबरा है। व्यापारी अभी तक नहीं संभल पाए हैं। राजनैतिक पार्टियों के एजेंडा से भी व्यापारी बाहर रहा है। जबकि देश के विकास में कर के रुप में बड़ा हिस्सा व्यापारी ही अदा करता है। अपने को उपेक्षित महसूस कर रहा व्यापारी वर्ग अब राजनीति में हिस्सेदारी की मांग उठा रहा है। विधान सभा चुनाव को लेकर व्यापारियों ने इन मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा की है। हालाकि व्यापारी वर्ग जीएसटी में सरकार के साथ खड़ा है लेकिन उसकी जटिलताओं व आर्थिक मंदी से उबारने कोई उपाय नहीं होने से उपेक्षित महसूस कर रहा है।
व्यापारी मो. आरीफ ने बताया कि नोटबंदी के बाद सरकार ने जीएसटी लागू कर दिया है। इससे लगातार बाजार गिरता गया, अभी तक बाजार नहीं संभला है। इन सबसे वाकिफ सरकारो ने बाजार को मंदी से उबारने कोई पहल भी नहीं की। घनश्याम कुलचंदानी ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद व्यापारियों को व्यापार करने में आजादी मिली है, लेकिन इसकी जटिलताओं ने समस्या बढ़ा दी है। आधी अधूरी तैयारी के बीच सरकार ने जीएसटी लागू किया। जबकि जीएसटी के नियमों में सरलीकरण की जरुरत है।
व्यापारी ओमकार गुप्ता एवं गोविंद बत्रा ने का कहना है कि जीएसटी सरकार का अच्छा कदम है इससे चोरी बंद हुई है। वहीं व्यापारियों को इंस्पेक्टर राज से मुक्ति मिली। लेकिन नोटबंदी में जो बाजार गिरा है उसे उठाने की जरुरत है। वासुदेव कुगवानी एवं वासुदेव सलिजा ने कहा कि परिवहन व्यापारियों की बड़ी समस्या है। सड़क की स्थिति में सुधार तो हुआ है लेकिन अभी भी सड़क उतनी बेहतर नहीं हुई जिससे जल्दी माल परिवहन हो सके। अभी माल का परिवहन बड़ी चुनौती है। महेश कोटवानी ने कहा व्यापारी देश में बड़ा हिस्सा टैक्ट के रुप में देता, लेकिन इसके बाद उसके हित राजनैतिक पाटियों के एजेंडा में शामिल नहीं होते हैं। जबकि वह भी अन्य मतदाताओं की तरह वोटर है ।
नोटबंदी ने नष्ट कर दी क्रय क्षमता-
व्यापारियों ने बताया कि नोटबंदी के बाद आम लोगों की क्रय क्षमता घट गई है। इसके बाद लगातार बढ़ती महंगाई के चलते लोग सिर्फ अनिवार्य आवश्यकताओं पर खर्च कर रहे हैं। यही कारण है कि लगातार बाजार गिरता जा रहा है। सरकार बाजार से क्रय क्षमता बढ़ाने महंगाई कम करने में विफल रही है। बाजार की मंदी का यह भी कारण है।