रीवा

पहले प्रवेश की लेटलतीफी अब चुनाव में प्रभावित हो रही पढ़ाई, जानिए क्या है स्कूल-कॉलेजों का हाल

छात्र हो रहे परेशान....
2 min read
Oct 09, 2018
academic staff in colleges
academic staff in colleges

रीवा. शासकीय कॉलेजों में छात्रों की पढ़ाई पहले प्रवेश प्रक्रिया में लेटलतीफी और अब विधानसभा चुनाव की भेंट चढ़ रही है। प्रवेश प्रक्रिया समाप्त होने के बाद सितंबर में शुरू हुई कॉलेजों की पढ़ाई रफ्तार पकड़ती, इससे पहले ही ब्रेक लग गया। अब की बार पढ़ाई में ब्रेक प्राध्यापकों की चुनाव ड्यूटी के चलते लगा है।

दरअसल निर्वाचन अधिकारियों ने ट्रेनिंग से लेकर तैयारी से संबंधित मॉनिटरिंग तक की जिम्मेदारी कॉलेजों के प्रोफेसरों को दी है। शासकीय कॉलेजों के नियमित प्राध्यापकों की ड्यूटी एक ओर जहां मास्टर ट्रेनरों में लगाई है। वहीं दूसरी ओर निगरानी और उडऩदस्ता दल में भी ज्यादातर प्राध्यापक ही शामिल हैंं। ऐसे में प्राध्यापक कॉलेज छोड़ चुनाव ड्यूटी पूरी करने में जुट गए हैं। हालांकि कुछ प्राध्यापकों को बीच में ड्यूटी से थोड़ी राहत मिलेगी, लेकिन ऐसे में उनके द्वारा अध्यापन कार्य जारी रख पाना मुमकिन नहीं जान पड़ रहा है।

प्राध्यापकों की चुनाव में ड्यूटी लगने की स्थिति में अब कॉलेजों की पढ़ाई अतिथि विद्वानों के भरोसे हो गई है। प्राचार्य अतिथि विद्वानों पर अतिरिक्त कक्षा लेने का दबाव बना रहे हैं, लेकिन उनके लिए यह संभव नहीं हो पा रहा है। क्योंकि बदली व्यवस्था के तहत पहले से ही अतिथि विद्वानों को पूरे दिन अध्यापनक कार्य करने के लिए पहले से ही अधिक कक्षाएं आवंटित की जा चुकी हैं।

गौरतलब है कि शासकीय कन्या महाविद्यालय को छोड़ दिया जाए तो टीआरएस, मॉडल साइंस व न्यू साइंस कॉलेज के 90 फीसदी प्राध्यापकों की ड्यूटी चुनाव में लगा दी गई है। जिले के सभी 22 कॉलेजों में नोडल मॉडल साइंस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरपी मिश्रा की भी निगरानी दल में ड्यूटी लगा दी गई है। सोमवार को अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा कार्यालय से भी कई कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।

प्राचार्यों को सता रही कक्षाएं पूरी करने की चिंता
ऐसे में प्राचार्यों को कक्षाएं पूरी करने की चिंता सता रही है। दरअसल विधानसभा चुनाव पूरा होने के बाद दिसंबर में सेमेस्टर परीक्षाएं शुरू हो जाएंगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमानुसार सेमेस्टर परीक्षा के लिए न्यूनतम 90 कक्षाओं का संचालन होना जरूरी है। जबकि अभी अधिकतम २५ कक्षाएं ही संचालित हो सकी हैं।

शासकीय स्कूलों में भी प्रभावित होगी पढ़ाई
प्राध्यापकों के अलावा चुनाव ड्यूटी में स्कूलों के प्राचार्यों और व्याख्याताओं की ड्यूटी भी लगाई गई है। नतीजा कॉलेजों की तरह शासकीय स्कूलों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। स्कूलों से लगाई गई ड्यूटी का अंदाजा महज इस बात से लगाया जा सकता है कि 85 मास्टर ट्रेनरों की सूची में 30 ट्रेनर स्कूलों के प्राचार्य हैं। बाकी कॉलेजों के प्राध्यापकों को मास्टर ट्रेनर बनाया गया है। इसके अलावा स्कूलों के व्याख्याताओं को पर्यवेक्षक सहित अन्य ड्यूटी में लगाया गया है।

Updated on:
09 Oct 2018 01:14 pm
Published on:
09 Oct 2018 12:54 pm