उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन में भी लापरवाही...
रीवा। सर, आप ही बताइए एक ही विषय में सारे के सारे छात्र कैसे फेल हो सकते हैं। चलिए एक पल के लिए यह मान भी लें कि कॉलेज में पढ़ाई नहीं हुई या प्रश्नपत्र कठिन आया तो सभी छात्र फेल हो गए। लेकिन एक विषय में फेल होने के बावजूद प्राप्तांक पूर्णांक से अधिक हो जाए भला यह कैसे हो सकता है। इससे तो जाहिर है कि हम सबके परीक्षा परिणाम में गड़बड़ी है।
कुलपति ने मामले को गंभीरता से लिया
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय पहुंचे जनता महाविद्यालय के एमएससी के छात्रों ने कुलपति के समक्ष कुछ ऐसी ही दलील दी। कुलपति ने मामले को गंभीरता से लिया और छात्रों से आवेदन लेकर संबंधित विभाग के अधिकारी को मामले की पड़ताल कराने को निर्देशित कर दिया। इसके बावजूद छात्रों को समस्या का समाधान संभव नहीं जान पड़ रहा है। क्योंकि संबंधित विभाग के अधिकारियों की ओर से छात्रों को कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।
छात्रों की अंकसूची में है कई त्रुटि
विश्वविद्यालय में उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन से लेकर परीक्षा परिणाम जारी करने तक बरती गई लापरवाही का खामियाजा भुगतने वाले जनता महाविद्यालय के छात्र अकेले नहीं हैं। उनके जैसे कई दूसरे कॉलेजों के छात्रों को त्रुटिपूर्ण अंकसूची मिली है। जिसे संशोधित कराने छात्र विश्वविद्यालय में अधिकारियों और बाबुओं का चक्कर लगा रहे हैं। स्थिति यह है कि विश्वविद्यालय अधिकारी छात्रों को जांच कराने के नाम पर बैरंग लौटा दे रहे हैं।
चौथे सेमेस्टर के 20 में से 19 छात्र हैं अनुत्तीर्ण
जनता महाविद्यालय में एमएससी चौथे सेमेस्टर के 20 में से 19 छात्र एक विषय एंटेमोलॉजी में अनुत्तीर्ण हैं। इसके अलावा अनुत्तीर्ण 19 छात्रों में से आधे से अधिक छात्रों का प्राप्तांक पूर्णांक 300 से अधिक है। छात्रों को 300 में से 315 से 350 अंक तक मिले हैं। छात्रों ने उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन व अंकसूची बनाने में त्रुटि होने का आरोप लगाया है। इस आरोप के साथ छात्रों ने विश्वविद्यालय अधिकारियों को लिखित आवेदन दिया है। इसके बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
लोक सेवा गारंटी का कोई मतलब नहीं
वैसे तो विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में लोकसेवा गारंटी अधिनियम के तहत कार्यों के निष्पादन संबंधित लंबा चौड़ा बोर्ड लगा हुआ है। लेकिन हकीकत में कार्यों के निष्पादन के बावत समय सीमा की कोई गारंटी नहीं है। शायद ही छात्रों की कोई समस्या लोकसेवा गारंटी अधिनियम के तहत निर्धारित अवधि में पूरी हो पाती हो। परीक्षा परिणाम, उत्तरपुस्तिकाओं के अवलोकन व अंकसूची में संशोधन के लिए दो से पांच दिन का समय निर्धारित है लेकिन छात्रों को बाबुओं का चक्कर लगाते महीना बीत जाता है।
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अराजकता का माहौल, सीट पर नहीं मिलते बाबू
विश्वविद्यालय में इन दिनों प्रशासनिक अक्षमता जैसे हालात दिखाई दे रहे हैं। अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों का मनमानी रवैया कुछ ऐसा ही जाहिर कर रहा है। मंगलवार को इसका जीता जागता उदाहरण देखने को मिला। एक ओर छात्र जहां परीक्षा परिणाम व अंकसूची में गड़बड़ी की समस्या को लेकर परेशान रहे। वहीं दूसरी ओर इंटरनेट की अंकसूची को सत्यापन कराना छात्रों के लिए नाकों चने चबाने जैसा साबित हुआ।
इंटरनेट की अंकसूची कराना है वेरीफाई
दरअसल वर्तमान में चल रही बीएड प्रवेश के दस्तावेज सत्यापन में छात्रों से इंटरनेट की वही अंकसूची स्वीकार की जा रही है, जिसे विश्वविद्यालय की ओर से वेरीफाई किया गया हो। छात्र सतना, सीधी व शहडोल जैसे जिलों से इंटरनेट की अंकसूची वेरीफाई कराने पहुंचे तो जरूर लेकिन कार्यालयों में उन्हें संबंधित बाबू नहीं मिले।
समस्या लेकर दूसरे जिलों से पहुंच रहे छात्र
सतना से अनूप तिवारी, रीवा के अमित शुक्ला व शहडोल के अजय कुमार अंकसूची वेरीफाइ कराने सुबह से ही परेशान रहे। लेकिन सभी अधिकारियों का दरवाजा खटखटाने के बावजूद दोपहर तीन बजे तक उनकी समस्या हल नहीं हुई। संबंधित बाबु सुबह हाजिरी देने के बाद ही कार्यालय से नदारद हो गया।
उपकुलसचिव बोली चुनाव कार्य में हैं व्यस्त
छात्रों ने उप कुलसचिव नीरजा नामदेव से समस्या बताई तो उन्होंने चुनाव संबंधित कार्यों में व्यस्त होने का हवाला दे दिया। छात्रों ने जब सहायक कुलसचिव लालमणि साकेत से समस्या बताई तो उन्होंने संबंधित बाबू से मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की लेकिन मोबाइल स्वीच ऑफ मिला। छात्र सुबह से लेकर शाम तक परेशान रहे।