
रीवा। समर्थन मूल्य पर उपज की कृषि उपज मंडियों व समितियों में हो रही खरीदारी में किसानों की समस्या पर अधिकारी भले ही तमाम निर्देश जारी करते हो। लेकिन किसानों की परेशानी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। वर्तमान में खरीदे गए उपज का उठाव नहीं होना वर्तमान में सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है।
शेड में नहीं बचा उपज रखने को स्थान
कृषि उपज मंडी करहिया में किसान पिछले कई दिनों में अपनी उपज लेकर ढेरा डाले हुए हैं। लेकिन न ही उनकी उपज की तौलाई का नंबर लग रहा है और न ही उपज की खरीदारी हो पा रही है। वजह यह है कि मंडी में बने शेड यानी चबूतरे पर स्थान ही खाली नहीं है। लगभग पूरे शेड में समितियों की ओर से खरीदा गया उपज रखा गया है। उपज का पिछले कई दिनों से उठाव नहीं हो पा रहा है। जिससे न ही स्थान खाली हो रहा है और न ही दूसरे किसानों के उपज की बिक्री हो पा रही है।
बताई जा रही ट्रांसपोर्टर की लापरवाही
मंडी में खरीदारी कर रहे समिति के कर्मचारियों का कहना है कि खरीदे गए उपज के उठाव की जिम्मेदारी एक निजी ट्रांसपोर्ट को दी गई है। लेकिन ट्रांसपोर्टर कई दिनों से उपज का उठाव नहीं कर रहा है। वहीं दूसरी ओर मंडी में ट्रांसपोर्ट के कर्मचारियों की दलील है कि उन्हें लोडिंग व अनलोडिंग के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं।
करहिया में चार समितियां कर रही खरीदारी
कृषि उपज मंडी में वर्तमान में चार समितियां खरीदारी कर रही हैं। चना, मसूर व सरसों की खरीदारी दुआरी समिति कर रही है। जबकि खैरा, बहुरीबांध व चोरहटा गेंहू की खरीदारी में लगी हुई है। किसानों को मुख्य समस्या गेंहू की बिक्री में हो रही है। खरीदारी नहीं होने से मंडी में उपज लदे वाहनों की लाइन लगी हुई है।
मंडी में किसानों की प्रमुख समस्या
- उपज का उठाव नहीं होने से नहीं लग रहा नंबर
- उपज सुरक्षित रखने को नहीं मिला रहा है स्थान
- पीने के लिए पानी व बैठने के लिए नहीं है स्थान
- मनमाने तरीके से की जा रही है उपज कि तौलाई
- तौलाई के लिए भी की जा रही है मनमानी वसूली
वर्जन -
-- मंडी में पानी पीने की व्यवस्था है और न ही बैठने के लिए स्थान। लेकिन यह सब कुछ नहीं चाहिए। अधिकारी बस केवल इतनी व्यवस्था कर दें कि उनकी उपज जल्द से बिक जाए ओर हम घर जाएं। लेकिन यहां न ही कोई सुनने वाला है और न ही देखने वाला।
डीपी रजक, किसान पटना।
-- अधिकारी आते हैं और निरीक्षण व हिदायत देकर चले जाते हैं। किसानों की समस्या से किसी का कोई लेना देना नहीं है। पूर्व में खरीदे गए उपज का उठाव नहीं हो रहा है। जिससे बाकी के किसानों की उपज का तौल नहीं हो पा रहा है। उठाव की व्यवस्था की जाए।
विवेक दुबे, किसान रघुराजगढ़।
-- तौल में मानमाने तरीके से अधिक उपज लिया जा रहा है। तौलाई अलग से देना पड़ रहा है। अच्छी फसल को अमानक बता देते हैं। अधिकारियों से भी शिकायत की गई। लेकिन किसी पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। जो साठगांठ कर लेता है व सिफारिस है। उसका सब काम ठीक से हो जाता है।
भैयालाल जायसवाल, किसान बम्हौरी।