रीवा

शासन-प्रशासन से लेकर सांसद व मंत्री तक की उपेक्षा झेल रहा प्रदेश का यह उत्कृष्ट संस्थान

महाविद्यालय में अव्यवस्था...
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Oct 06, 2018
Rewa Sanskrit College neglect, student not interest in admission
Rewa Sanskrit College neglect, student not interest in admission

रीवा. सुव्यवस्थित पुस्तकालय व स्मार्ट कक्षाओं की बात तो दूर जरूरत की किताबें और कक्षा में बैठने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। कुछ ऐसी ही कई दूसरी अव्यवस्थाओं के चलते छात्र प्रवेश लेने का मन बनाकर भी वापस लौट जाते हैं। बात जिले के इकलौते शासकीय वेंकट संस्कृत महाविद्यालय की कर रहे हैं।

प्रवेशित छात्रों की संख्या 32 तक सीमित
शासन-प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक की उपेक्षा का दंश झेल रहे संस्कृत महाविद्यालय में इस बार भी केवल चंद छात्रों के प्रवेश हुए हैं। महाविद्यालय प्रशासन की ओर से एड़ीचोटी का जोर लगाए जाने के बाद ऑफलाइन प्रक्रिया के तहत छात्रों ने प्रवेश के लिए आवेदन तो एक सौ से अधिक छात्रों ने दिया, लेकिन प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या महज 32 तक सीमित रही है। महाविद्यालय की दयनीय स्थिति को देखने के बाद छात्र प्रवेश लेने वापस नहीं लौटे।

अव्यवस्था के चलते छात्रों में अरुचि
महाविद्यालय प्रशासन स्नातक (शास्त्री) व स्नातकोत्तर (आचार्य) पाठ्यक्रम में प्रवेशित छात्रों की कम संख्या को संस्कृत के प्रति घटते रुझान का नतीजा बताते हैं, लेकिन प्रवेश के लिए आकर छात्रों के लौट जाने के पीछे महाविद्यालय की अव्यवस्था को ही कारण माना जा रहा है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. वीपी मिश्रा भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि जिसे कहीं प्रवेश नहीं मिलता है। वही यहां प्रवेश लेता है।

स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में केवल नौ प्रवेश
संस्कृत महाविद्यालय के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में इस बार केवल नौ प्रवेश हुए हैं। स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या 23 है। स्नातक व स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के सभी छात्रों को मिला लिया जाए तो भी यह संख्या केवल 54 तक पहुंचती है। कई छात्र तो प्रवेश लेने के बाद बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। नतीजा प्रवेशित छात्रों की तुलना में छात्रसंख्या वर्ष दर वर्ष कम होती जाती है।

प्रस्ताव 25 लाख का, मिले छह लाख रुपए
महाविद्यालय से संरचनात्मक व अकादमिक विकास के लिए शासन को प्रस्ताव तो २५ लाख रुपए का भेजा गया है, लेकिन स्वीकृति महज छह लाख रुपए की मिली है। मांग और स्वीकृत बजट का यह अंतर शासन की महाविद्यालय के प्रति उदासीनता को बयां करने के लिए पर्याप्त है। महाविद्यालय की जनभागीदारी समिति में सांसद जनार्दन मिश्रा व विधायक के तौर पर उद्योग मंत्री राजेंद्र शुक्ला भी शामिल हैं, लेकिन किसी ने कोई रुचि नहीं दिखाई है।

महाविद्यालय में शौचालय तक नहीं उपलब्ध
महाविद्यालय की अव्यवस्था का अंदाजा महज इस बात से लगाया जा सकता है कि वहां छात्रों के लिए शौचालय तक मुहैया नहीं है। यह बात और है कि शासन-प्रशासन के अधिकारी स्वच्छता अभियान चलाने में जुटे हैं। फिलहाल पिछले दो वर्षों की पुरजोर कोशिश के बाद शासन ने महाविद्यालय में शौचालय निर्माण के लिए बजट जारी कर दिया है। अब देखना है कि निर्माण एजेंसी निर्माण का कार्य कब शुरू और कब पूरा करती है।

महाविद्यालय में यह भी हैं अव्यवस्थाएं
- परिसर में छात्रों के लिए पेयजल की उचित व्यवस्था नहीं है।
- पुस्तकालय के बजट के अभाव में खरीदी नहीं जा सकी किताब।
- कक्षाओं व पुस्तकालय में बैठ व्यवस्था भी पूरी तरह से अव्यवस्थित।
- नियमित प्राध्यापकों की संख्या चार, पढ़ाई अतिथि विद्वानों के भरोसे।
- छात्रों को तकनीकी ज्ञान दिए जाने की महाविद्यालय में नहीं कोई सुविधा।

Updated on:
06 Oct 2018 12:19 pm
Published on:
06 Oct 2018 12:19 pm