रीवा

Rewa Sanjay Gandhi Hospital: जिंदा मरीज को मृत घोषित कर परिजनों को सौंपा, अस्पताल से बाहर ले जाते समय चलने लगी सांसें

Patient Declared Dead: संजय गांधी अस्पताल में लापरवाही का एक और मामला, 82 वर्षीय मरीज को मृत घोषित करने के बाद बाहर ले जाते समय मिले सांस और पल्स के संकेत, विभागाध्यक्ष ने जांच की बात कही।
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Updated: 5 Sep 2026, 9:03 PM IST
sanjay gandhi hospital live patient declared dead
sanjay gandhi hospital live patient declared dead, संजय गांधी अस्पताल का आईसीयू वार्ड व परिजनों को दी गई पर्ची (Source-Patrika)

Rewa Sanjay Gandhi Hospital Patient Declared Dead: मध्यप्रदेश के रीवा के संजय गांधी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में लापरवाही का विवाद अभी थमा भी नहीं है और एक और गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल में 82 वर्षीय मरीज को मृत घोषित कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत परिजनों को सौंप दिया गया। परिजन चौथी मंजिल से मरीज को लेकर नीचे आए और घर ले जाने के लिए शव वाहन की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान मरीज में सांस और हलचल के संकेत दिखाई दिए। इसके बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया और मरीज को आनन-फानन में दोबारा उपचार के लिए भर्ती कराया गया। फिलहाल मरीज की हालत गंभीर बताई जा रही है।

जिंदा मरीज को मृत घोषित किया

सीधी निवासी गिरजा प्रसाद गुप्ता (82) को 4 सितंबर की रात करीब 11:30 बजे संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें मेडिसिन विभाग के 4-बी सेक्शन में बेड नंबर 33 पर भर्ती किया गया था। परिजनों के मुताबिक डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद मृत घोषित मरीज को परिजनों के सुपुर्द करने की प्रक्रिया पूरी की गई और परिजनों के हस्ताक्षर भी लिए गए। घर ले जाने के लिए वाहन बुलाया गया था, इसी दौरान परिजनों को मरीज के शरीर में हलचल नजर आई। उन्होंने तत्काल अस्पताल के चिकित्सकों को इसकी जानकारी दी। मरीज को कैजुअल्टी ले जाया गया, जहां दोबारा सांस और पल्स मिलने की बात सामने आई। इसके बाद उसे आईसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया।

पीजी प्रथम वर्ष के डॉक्टर ने किया था परीक्षण

बताया गया कि गिरजा प्रसाद गुप्ता को डॉ. अनुराग चौरसिया की देखरेख में भर्ती किया गया था। उस दौरान उपचार व्यवस्था में पीजी प्रथम वर्ष के डॉक्टर भी शामिल थे। मरीज को मृत घोषित करने के बाद शव सौंपने की प्रक्रिया पूरी की गई। संबंधित दस्तावेज में डॉ. निवेश सविता की सील होने की बात भी सामने आई है। परिजनों और मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि गंभीर मरीज को मृत घोषित करने से पहले वरिष्ठ चिकित्सक की मौजूदगी और आवश्यक चिकित्सकीय पुष्टि को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

डॉक्टर ने बताया ‘लेजारस सिंड्रोम’

मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. पीके बघेल ने मामले को एक दुर्लभ चिकित्सकीय स्थिति से जोड़ते हुए 'लेजारस सिंड्रोम’ की संभावना बताई। उनके अनुसार मरीज 80 वर्ष से अधिक उम्र का है और सांस संबंधी बीमारी के साथ लकवे की समस्या से भी पीड़ित था। पीजी प्रथम वर्ष के चिकित्सक ने मरीज की पल्स, हार्ट रेट और हार्ट साउंड चेक की, जो उस समय नहीं मिली। इसके बाद मरीज को मृत घोषित किया गया। हालांकि बाद में कैजुअल्टी में ले जाने के बाद मरीज में दोबारा पल्स और सांस के संकेत मिलने लगे। इसके बाद उसे आईसीयू में लेकर उपचार शुरू किया गया। उन्होंने बताया कि ऐसी दुर्लभ परिस्थितियों में कुछ समय के लिए जीवन के संकेत नहीं मिलते और बाद में दोबारा दिखाई दे सकते हैं। मरीज की हालत अभी गंभीर है और उसका उपचार जारी है।

Updated on:
5 Sep 2026, 9:03 PM IST
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