कोई गौरफरमाने की नहीं समझ रहा जरूरत....
रीवा। छत पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। कमरों की छत में बीम या गार्डर जैसा कोई सपोर्ट भी नहीं है। छात्र और शिक्षक पूरे समय छत के ढह जाने की आशंका से भयाक्रांत रहते हैं। मजबूरन जान खतरे में रखकर अध्ययन-अध्यापन कर रहे हैं।
अमवा पूर्व माध्यमिक विद्यालय का हाल
बात जिला मुख्यालय से चंद दूरी पर स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय अमवा की कर रहे हैं। पूर्व माध्यमिक स्तर के इस विद्यालय का भवन कभी भी बड़े हादसे की वजह बन सकता है। इस वस्तुस्थिति से विद्यालय प्राचार्य की कई बार शिक्षा अधिकारियों सहित जिला प्रशासन के अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन नतीजा सिफर रहा है।
सपोर्ट में न ही लगा बिम और न ही है गार्डर
भवन की छत में सपोर्ट लगवाने की बात तो दूर कोई भी अधिकारी गौरफरमाने तक को तैयार नहीं है। विद्यालय के प्राचार्य और शिक्षकों ने अधिकारियों की उदासीनता को देखते हुए सभी कुछ कुदरत के रहम पर छोड़ दिया है। जबकि अधिकारियों की थोड़ी सी सक्रियता और छत में सपोर्ट के रूप में बिम या गार्डर लगाए जाने से हादसे के संकट टल सकता है।
डीइओ व सीइओ नहीं फरमा रहे गौर
विद्यालय के प्राचार्य व शिक्षकों की माने तो भवन के इस स्थिति की जानकारी पूर्व में न केवल जिला शिक्षा अधिकारी व जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को दी गई है, बल्कि कलेक्टर को भी इस संबंध में जानकारी दी गई है। कोई कार्यवाही नहीं होते देख विद्यालय स्टॉफ अब शांत बैठ गया है।
मानकों को ताक पर रखकर बनाया गया
वर्ष 1995 बने विद्यालय के भवन को मानक ताक पर रख बनाया गया है। बिना किसी सपोर्ट के बड़े-बड़े कमरों की बनाई गई छत इस बात को बयां करने के लिए काफी है। बिना सपोर्ट के बनाई गई कमरों और बरामदे की छत से गिराते प्लास्टर वहां पढऩे वाले छात्रों और पढ़ाने वाले शिक्षकों के सिर पर मडराते संकट को बयां करने के लिए पर्याप्त साबित है।
ढह चुकी है स्कूल के दो कमरों की छत
छात्रों व शिक्षकों के सिर पर मडराने वाले संकट का अंदाजा केवल इस बात से लगाया जा सकता है कि विद्यालय भवन के दो कमरों की छत ढह चुकी है। ढह चुकी छत भी उसी तरह बिना सपोर्ट के बनाई गई थी, जिस तरह बाकी के दूसरे कमरों की छत बनी है। वर्तमान में इन कमरों में मजबूरी में ही सही छात्रों की कक्षाएं लगती हैं।
फैक्ट फाइल
विद्यालय में शिक्षक व छात्रसंख्या
125 छात्र-छात्राएं कक्षा आठ तक
07 नियमित व अतिथि शिक्षक