रीवा

दिल्ली से एमपी आए राजनीतिज्ञ ने कहा, इंडिया में है दम, तभी तो विदेशी रहते हैं परेशान, जानिए फिर क्या हुआ

भारतीय ज्ञान की परंपरा पर रखा विचार...
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Updated: 10 Jul 2018, 2:30 PM IST
Special Lecture organized in APS University Rewa, politicians joined
Special Lecture organized in APS University Rewa, politicians joined

रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में डॉ. उमा परौहा स्मृति व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। व्याख्यानमाला में बतौर मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रो. श्रीप्रकाश सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने व्याख्यानमाला के विषय पर विस्तृत रूप में प्रकाश डाला।

नालंदा के ग्रंथों का दिया उदाहरण
जवाहरलाल नेहरू नीति शोध केंद्र की ओर से आयोजित व्याख्यानमाला में प्रो. सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान की कोई ऐसी परंपरा जरूर रही है, जिस पर मैक्समूलर सहित दूसरे देशों के चिंतक, इतिहासकार व विद्वान चिंतन करने को बाध्य हुए। कहा कि तक्षशिला व नालंदा के ग्रंथों व ग्रंथकार इसके उदाहरण हैं। उन्होंने लोगों से अपील किया कि हम सब को अपनी भारतीय ज्ञान परंपरा व महाभारत, मनुस्मृति, छंदोंग्योपनिषद्, नारदसंहिता जैसे कूटनीति ग्रंथों का स्वाध्याय करना चाहिए।

इंडियन जर्नल का भी हुआ विमोचन
विश्वविद्यालय के एमबीए विभाग के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित डॉ. केके परौहा ने व्याख्यान माला के आयोजन व ‘इंडियन जर्नल ऑफ पालिसी स्टडीज’ के प्रकाशन के प्रति आभार प्रगट किया इसकी पृष्ठभूमि से सभी को अवगत कराया।

कुलपति प्रो. केएनएस यादव ने की अध्यक्षता
व्याख्यानमाला की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. केएन सिंह यादव ने स्वर्ण जयंती आयोजन वर्ष में नीति शोध केंद्र को इस आयोजन के लिए बधाई दी और बहुआयामी शोध जर्नल के प्रकाशन को सराहा। कहा कि वह शोध जर्नल के प्रवेशांक के अनुवर्ती अंकों के नियमित प्रकाशन की अपेक्षा करते हैं।

इन विशेषज्ञों ने भी रखा विचार
इससे पहले केंद्र के पूर्व संचालक प्रो. वीपी गुप्ता ने विषय पर अपना विचार रखा और आयोजन के लिए केंद्र के संचालक प्रो. राजीव दुबे को बधाई दी। कार्यक्रम में प्रो. एनपी पाठक, प्रो. दीपा श्रीवास्तव, प्रो. अंजलि श्रीवास्तव, प्रो. दिनेश कुशवाहा, प्रो. आरएन पटेल, प्रो. पीके राय, प्रो. अतुल पांडेय, प्रो. रचना श्रीवास्तव, प्रो. गीता सिंह, प्रो. शालिनी दुबे, नलिन दुबे व डॉ. रेखा शर्मा सहित अन्य प्राध्यापक उपस्थित रहे।

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