शिक्षकों से मिला माता-पिता जैसा प्यार, परंपरागत तरीके से दी गई विदाई...
रीवा। कभी जिस स्कूल में परिवार को छोडक़र रोते हुए आते थे। आज उससे इतना लगाव हो गया है कि जाने को मन नहीं कर रहा है। अब तो यह स्कूल अपने घर से भी प्यारा लगने लगा है। विदाई के मौके पर छात्रों ने कुछ इस तरह फिलिंग शेयर किया। बात सैनिक स्कूल में आयोजित बारहवीं कक्षा के छात्रों की फेयरवेल सेरेमनी की कर रहे हैं।
काव्य पाठ के जरिए बयां की दिल की बात
स्कूल में परंपरागत तरीके से आयोजित फेयरवेल सेरेमनी में उस समय कई छात्रों की आंखे भर आईं, जब उनके द्वारा स्कूल में बिताए गए पलों को जूनियर्स और टीचर्स के साथ शेयर किया। छात्रों ने अपनी अभिव्यक्ति को काव्य पाठ व भाषण के जरिए प्रस्तुत किया गया।
छोटी से उम्र में आते हैं बच्चे
प्रदेश के इकलौते सैनिक स्कूल में बच्चों का प्रवेश कक्षा छह में होता है। प्रवेश के बाद बच्चे कक्षा १२ वीं तक की पढ़ाई करते हैं। पढ़ाई के इन सालों में बच्चों का लगभग पूरा समय स्कूल में ही बीतता है। माता-पिता व परिवार से दूर रहकर छात्र स्कूल परिसर में ही रहता है।
शिक्षक बनते हैं अभिभावक
स्कूल में सात वर्ष गुजारने के दौरान स्कूल के शिक्षक और छात्रावास के वार्डेन उनके अभिभावक की भूमिका निभाते हैं। इन छात्रों का परिवार उनका हाउस व कक्षा के सहपाठी होते हैं। इन सात सालों में छात्र एक दूसरे के इतने करीब आ जाते हैं कि यह रिश्ता परिवार से कम नहीं होता है और पूरी समय बना रहता है।
नए कप्तान को भेंट किया बैटन
परंपरा के अनुरूप स्कूल कप्तान रहे छात्र ने नए कप्तान को तलवार व बैटन प्रदान किया। यह प्रक्रिया स्कूल की परंपरा में शामिल है। कार्यक्रम के अंत में बतौर मुख्य अतिथि स्कूल के उप प्राचार्य स्क्वाड्रन लीडर एम राजकुमार ने छात्रों को परीक्षा के लिए शुभकामना देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर स्कूल के प्रशासनिक अफसर लेफ्टिनेंट कमांडर रोहित शर्मा, वरिष्ठ अध्यापक डॉ. दिनेश सिंह सहित अन्य स्टॉफ उपस्थित रहा।