
Sagar News :मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दो चीतों को बाड़े में छोड़ दिया है। यहां आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि, कूनो और गांधी सागर में सिर्फ चीते हैं, कुछ तेदूंए भी थे, लेकिन वीडीटीआर ऐसा रिजर्व है, जिसमें चीता के साथ टाइगर भी हैं। यही वीडीटीआर की विशेषता है।
चीता प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश का सफलतम प्रोजेक्ट है। मध्य प्रदेश की धरती वन्यजीवों के लिए अनुकूल है। मध्य प्रदेश में विलुप्त हो चुके गिद्ध, दुर्लभ कछुआ, चीता, बाघ सभी वन्यजीव मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि वन अधिकारियों ने बताया कि वीडीटीआर में करीब 160-70 साल पहले चीतों को देखा गया था। उन्होंने कहा कि, अभी हमने दो चीते छोड़े हैं, लेकिन अगले महीने दो और चीते छोड़े जाएंगे और वे चारों अपना परिवार बढ़ाएंगे। वीडीटीआर में अब जंगल का आनंद आएगा, क्योंकि सभी वन्यजीव यहां पर हैं।
पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव की मांग पर सीएम यादव ने कहा कि, सरकार कोशिश कर रही है कि, रिजर्व से लगे लोगों को रोजगार के साधन भी उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि, आज होम स्टे का चलन बढ़ गया है। वीडीटीआर से जुड़े लोग भी ऐसा कर सकते हैं। ऐसे लोगों को सरकार भी दो-तीन लाख रुपए की मदद कर रही है।
सीएम यादव ने मंच से संबोधन करते हुए कहा कि, आज हम यहां चीते छोड़ रहे हैं और हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टाइगर के रूप में 56 इंच के सीना के साथ पूरे विश्व में देश की नीति-रीति के हिसाब से काम कर रहे हैं। आज पूरी दुनिया भारत की ओर उम्मीद की नजरों से देख रही है, लेकिन एक पप्पू हमारे यहां भी हैं, जो सत्ता चली जाने के कारण कुछ भी कर रहे हैं। पता नहीं क्या है? भगवान उन्हें सद्बबुद्धि दे। हम चीता छोड़ते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में आयोजित "वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह" के समापन समारोह में गिद्ध संख्या आकलन-2026 रिपोर्ट जारी की। प्रदेश में गिद्धों की संख्या में 123 फीसदी की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है, जो मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रभावी प्रयासों की सफलता का प्रमाण है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुंदेली बोली में रचित पुस्तक 'वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व' का विमोचन भी किया, जो बुंदेलखंड की समृद्ध प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगी।
ये सिर्फ दो चीतों को एक नए जंगल में छोड़ने की कवायद नहीं, बल्कि चीता प्रोजेक्ट के विस्तार और भारत में चीता आबादी को नए इलाकों में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कुनो नेशनल पार्क और गांधी सागर के बाद अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश का तीसरा चीता हैबिटेट बन गया है।
भारत में चीते को 1952 में विलुप्त घोषित कर दिया गया था। इसके करीब सात दशक बाद सितंबर 2022 में चीता प्रोजेक्ट के तहत नामीबिया से 8 चीते भारत लाए गए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन्हें कुनो नेशनल पार्क में छोड़ा। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से भी चीते भारत लाए गए। मकसद सिर्फ चीतों को भारत लाना नहीं था, बल्कि भारत की परिस्थितियों में उनकी आबादी को फिर से स्थापित करना और उन्हें प्राकृतिक रूप से प्रजनन करने लायक बनाना था।
प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक ये है कि, भारत में चीतों ने प्रजनन शुरू किया। 2023 में भारतीय धरती पर सात दशक से ज्यादा समय बाद पहली बार चीता शावकों का जन्म हुआ। इसके बाद लगातार कई लिटर हुए और भारत में जन्में चीतों की संख्या बढ़ती गई।
भारत में जन्मी मादा चीता खुद मां बन रही हैं। अप्रैल 2026 में भारत में जन्मी मादा केजेपी-12 ने कुनो में चार शावकों को जन्म दिया था। सितंबर 2026 में उसने फिर 4 शावकों को जन्म दिया। इसके बाद 5 अक्टूबर को भारत में जन्मी 32 महीने की मादा चीता केजेपी-21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। ये भारत में जन्मी किसी मादा चीता की तीसरी ऐसी उपलब्धि है। इसके साथ भारत में चीतों की कुल संख्या 60 हो गई, जिसमें 41 भारत में जन्में चीते हैं। यही प्रोजेक्ट के लिए सबसे अहम संकेतों में से एक है।
अब इस बढ़ती आबादी को सिर्फ एक जगह तक सीमित रखने की बजाय नए सुरक्षित इलाकों में फैलाने की रणनीति पर काम हो रहा है। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व करीब 2,339 वर्ग किलोमीटर में फैला है और मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। यहां चीतों के लिए खुले जंगल, घास के मैदान और पर्याप्त शिकार मौजूद है। वैज्ञानिक आकलन में भी इसको चीतों के लिए उपयुक्त माना गया था। शुरुआत में चीतों को करीब 439 हेक्टेयर के सॉफ्ट रिलीज इनक्लोजर में रखा गया है। यहां उनकी निगरानी, स्वास्थ्य और नए वातावरण में अनुकूलन पर नजर रखी जाएगी।
अब तक भारत की चीता कहानी का सबसे बड़ा केंद्र कुनो रहा है। लेकिन, नौरादेही में चीतों की मौजूदगी इस कहानी को एक नए भूगोल में ले गई है। यानी अब मध्य प्रदेश में चीता संरक्षण के तीन बड़े केंद्र हैं, इनमें कुनो नेशनल पार्क, गांधी सागर वाइल्डलाइफ सेंचुरी, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व हैं। यानी लक्ष्य सिर्फ चीतों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि अलग-अलग सुरक्षित इलाकों में उनकी आबादी को फैलाना भी है।