सागर

सोते समय गले में फंसे नकली दांत, एक्स-रे में भी नहीं दिखा, सागर में डॉक्टरों ने बचाई जान

Fake Teeth stuck in throat: मध्य प्रदेश के दमोह जिले के निवासी के गले में नकली प्लास्टिक के दांत फंसने से मचा हड़कंप मच गया। डॉक्टर्स ने जटिल प्रक्रिया से निकाले दांत।
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Updated: 10 Jun 2026, 8:07 PM IST
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fake teeth stuck in throat case: बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में आया नकली दांत गले में फंसने का मामला (फोटो सोर्स- MBBS Council website)

Fake Teeth cause breathing problems: मध्य प्रदेश के सागर जिले से चौंका देने वाला मामला सामने आया है। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC Sagar) के इएनटी विभाग में डॉक्टर्स ने एक मरीज के गले में फंसे 3 नकली दांत का सेट निकालकर उसकी जान बचाई। मरीज रात में सोते समय नकली दांत निकालना भूल गया था। गहरी नींद में वह दांत का सेट श्वास नली में अटक (Fake Teeth stuck in throat) गया था। आधी रात जब उसकी सांसें थमने लगीं तो आनन-फानन में परिजन उसे लेकर बीएमसी पहुंचे। मरीज का ऑक्सीजन लेवल लगातार गिर रहा था। किसी तरह इएनटी और एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टर्स की संयुक्त टीम ने जटिल प्रक्रिया के जरिया गले से नकली दांत का सेट निकाला और उसकी जान बचाई।

रोज निकालकर रखते थे, रात को भूल गए

दरअसल, दमोह जिला निवासी 56 वर्षीय रामदास ने डॉक्टर्स को बताया कि वह लंबे समय से आगे के तीन कृत्रिम दांत लगाते आ रहे हैं। रात को अक्सर वह सोने के पहले दांत निकाल देते थे, लेकिन बीती रात वह भूल गए। आधी रात के बाद अचानक उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी और गले में कुछ फंसा हुआ महसूस हुआ। रात को ही उन्होंने परिजन को समस्या बताई, तो परिजन तत्काल उन्हें बीएमसी लेकर आए, जहां जांच व जटिल प्रक्रिया के तहत दांतों को बाहर निकाला गया।

व्यक्ति के गले में फंसे हुए दांतों को डाक्टरों ने ऑपरेशन के बाद बाहर निकाला (फोटो सोर्स- Patrika)

एसोफैगोस्कोपी तकनीक से बाहर निकले दांत

कृत्रिम दांत प्लास्टिक सामग्री के बने हुए थे, इसलिए वे शुरुआती एक्स-रे में दिखाई नहीं दे रहे थे। यह एक बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति थी। इएनटी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नीतू बजाज ने बिना समय गंवाए एसोफैगोस्कोपी तकनीक की सहायता से तीन कृत्रिम दांतों के जुड़े हुए सेट को बाहर निकाल लिया। एसोफैगोस्कोपी तकनीक में डॉक्टर ने भोजन नली के अंदरूनी हिस्से की जांच की। कैमरे लगी एक पतली, लचीली नली का उपयोग किया। आम तौर पर डॉक्टर इस तकनीक का उपयोग अल्सर, ट्यूमर, एसिड रिफ्लक्स और कैंसर जैसी बीमारियों में करते हैं।

थोड़ी देर होती तो जा सकती थी, मरीज की जान

एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. सर्वेश जैन, डॉ. दीपक गुप्ता ने मरीज को जनरल एनेस्थीसिया दिया। डॉ. सर्वेश जैन के बताया कि नकली दांत आहार नली और श्वास नली के ठीक मुहाने पर फंसे थे, इसके कारण मरीज का ऑक्सीजन सैचुरेशन बार-बार तेजी से गिर रहा था। यदि समय रहते यह उपचार नहीं मिलता, तो श्वास पूरी तरह बंद होने से मरीज की जान भी जा सकती थी। वहीं डॉ. नीतू बजाज ने आम लोगों से अपील की है कि जो लोग भी डेंटल इम्प्लांट, नकली दांत या किसी भी प्रकार की अस्थाई डेंटल डिवाइस का उपयोग करते हैं, वे रात में सोने से पहले उसे अनिवार्य रूप से निकाल दें।

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10 Jun 2026, 8:07 PM IST
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