
बीना. किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ एकीकृत डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किसानों की फॉर्मर आईडी बनाई जा रही हैं, जो कई किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई हैं। किसानों की फॉर्मर आईडी तो तैयार हो गई हैं, लेकिन उसमें उनके सभी कृषि भूमि के खसरा नंबर दर्ज नहीं हो पाए हैं। ऐसे में किसानों की पूरी भूमि पोर्टल पर न दिखने से विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में दिक्कत आ रही है।
ब्लॉक में कुल 29 हजार 968 फॉर्मर आईडी हैं, जिसमें करीब 30 हजार खसरा नहीं जुड़ पार रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनके नाम पर कई खसरा नंबर दर्ज हैं, लेकिन फॉर्मर आईडी में केवल एक या दो खसरे ही दिखाई दे रहे हैं। शेष भूमि का विवरण पोर्टल पर नहीं आने से रिकॉर्ड अधूरा माना जा रहा है। इसके कारण किसानों को फसल संबंधी योजनाओं, अनुदान, बीज वितरण, खाद वितरण, ऋण सुविधा और अन्य कृषि योजनाओं का लाभ लेने में बाधाएं आ रही हैं।
किसान पटवारी के काट रहे चक्कर
ग्रामीण क्षेत्रों में किसान लगातार पटवारी और अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। किसान संघ भी कई बार आवेदन देकर आईडी अपडेट कराने की मांग कर चुके हैं, लेकिन फिर कार्य नहीं हो पा रहा है। पोर्टल में भी समस्या आ रही है। जिन किसानों की जमीन अलग-अलग गांवों या अलग-अलग खसरों में दर्ज है, उन्हें अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसमें सुधार करने की मांग किसान बहुत पहले से कर रहे थे, लेकिन फिर भी समय पर सुधार नहीं किया गया है।
फॉर्मर आईडी क्यों है जरूरी
फॉर्मर आईडी के माध्यम से किसान की भूमि, फसल और अन्य विवरण एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहते हैं और इसके माध्यम से कृषि योजनाओं, अनुदान, फसल पंजीयन, बीमा, समर्थन मूल्य पर खरीदी तथा अन्य सरकारी सुविधाओं के लिए फॉर्मर आईडी महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में उपयोग की जाएगी।
चल रही है प्रक्रिया
फॉर्मर आईडी में खसरे जोडऩे का कार्य चल रहा है। कई खसरा जुडऩे के बाद भी पोर्टल पर नहीं दिख रहे हैं, लेकिन जल्द ही यह कार्य पूर्ण हो जाएगा।
डॉ. अंबर पंथी, तहसीलदार, बीना