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लोगों ने कहा तीन दशकों से रह रहे हैं सौ परिवार, नपा को दे रहे हैं टैक्स, इसके बाद भी दिए जा रहे मकान खाली करने के नोटिस

लोगों ने कहा वह रजिस्ट्री कराने भी तैयार, प्रदर्शन कर सौंपा तहसीलदार को ज्ञापन, तहसीलदार ने कहा न्यायालय के आदेश पर किया गया है नोटिस जारी
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Residents stated that a hundred families have been living there for three decades and paying taxes to the municipal council

प्रदर्शन करते हुए लोग। फोटो-पत्रिका

बीना. गनेश वार्ड में दाराशाह बंगला की भूमि पर तीन दशक से करीब सौ परिवार रह रहे हैं, लेकिन अब जमीन खाली करने के लिए कहा जा रहा है। यदि ऐसा होता है, तो वह बेघर हो जाएंगे। रहवासियों ने पूर्व जनपद अध्यक्ष इंदर ङ्क्षसह के नेतृत्व में सोमवार को गांधी चौराहे पर एकत्रित होकर तहसील तक पैदल रैली निकाली और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि करीब तीन दशक से उस जगह पर रह रहे हैं और उनके आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशनकार्ड, बिजली कनेक्शन हैं। साथ ही नगर पालिका में टैक्स जमा करते हैं। इतने वर्षों में कभी नोटिस नहीं आया और न ही निर्माण कार्य रोकने कोई आया है। भूमि के पूर्व मालिक ने रहवासीयों से राशि लेकर बसाया था और कहा था कि प्रकरण समाप्त होने पर रजिस्ट्री कर दी जाएगी, लेकिन इस दौरान उनकी मृत्यु हो गई है। इसके बाद 29 जुलाई 26 को कब्जा दिलाने के लिए तहसीलदार आदि मौके पर गए थे, जहां पर परवेज पिस्टन के साथ सभी रहवासियों की चर्चा हुई, जिसमें प्लाट खरीदने एवं बेचने को तैयार हो गए थे और पंचनामा बनाकर सभी पक्षों के हस्ताक्षर कराए थे। परवेज पिस्टन ने रजिस्ट्री करने के लिए समय मांगा है और रहवासी अपने मकान के प्लाट की रजिस्ट्री कराने तैयार है। विक्रय पत्र कराने के लिए 45 दिन की पेशी लगाई गई है। इसके बाद तहसीलदार द्वारा 30 जुलाई को मकानों के तोडऩे और कब्जा हटाने का नोटिस जारी कर दिया गया है। रहवासियों ने इस प्रकार की कार्रवाई न करने की मांग की है।

पूरी पूंजी मकान में लगा दी
मथुरा अहिरवार ने बताया कि वह कई वर्षों से वहां रह रही हैं और पूरी पूंजी मकान में लगा दी है। इसलिए वह मकान खाली नहीं करेंगी। यदि मकान नहीं रहा तो वह कहां जाएंगे। प्लाट खरीदने सभी तैयार हैं, लेकिन किसी और व्यक्ति को जमीन बेचना न्यायसंगत नहीं है। कुछ लोगों द्वारा शिकायत न करने की धमकी दी जा रही है।

न्यायालय का है आदेश
उक्त जमीन परवेज पिस्टन के परिवार की है। 1996 अपर जिला सत्र न्यायाधीश ने उन्हें कब्जा दिलाने का आदेश दिया थो, लेकिन दूसरे पक्ष के लोग हाईकोर्ट चले गए थे। अब हाइकोर्ट ने आदेश किए हैं कि भूमि परवेज पिस्टन और परिवार के लोगों की है। अपर जिला सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में निष्पादन का प्रकरण विचाराधीन है और न्यायालय से परवेज को कब्जा दिलाने का पत्र प्राप्त हुआ है, इसलिए परिवारों को नोटिस जारी कर कब्जा हटाने के लिए कहा गया है।
डॉ. अंबर पंथी, तहसीलदार, बीना