. वैशाख माह में लोग गर्मी से परेशान हैं। मंदिरों में भगवान को शीतलता प्रदान करने के लिए नौका विहार कराया जाएगा। बुधवार को बड़ा बाजार इलाके में श्रीदेव बांके राघव जी मंदिर में भगवान सतरंगी फूलों से सजी नौका पर जलविहार के लिए निकले।
बड़ा बाजार स्थित देवराघव मंदिर में नौका विहार का हुआ आयोजन
सागर. वैशाख माह में लोग गर्मी से परेशान हैं। मंदिरों में भगवान को शीतलता प्रदान करने के लिए नौका विहार कराया जाएगा। बुधवार को बड़ा बाजार इलाके में श्रीदेव बांके राघव जी मंदिर में भगवान सतरंगी फूलों से सजी नौका पर जलविहार के लिए निकले। जलविहार के बाद खस के शरबत का भोग लगाया गया, जिसे श्रद्धालुओं में वितरण किया गया। मंदिर के पुजारी नितईदास ने बताया कि भगवान का पांच नदियों के पवित्र जल से जलाभिषेक कर पूजन किया जा रहा है। वृंदावन से आई नई रत्न जड़ित पोशाक धारण कराई गई। मोगरा, बेला एवं गेंदे के फूलों से भगवान का शृंगार किया गया। भजन कीर्तन हुए और शाम को सतरंगी फूलों से सजी नौका पर राघवजी सरकार सवार होकर विहार करते हैं। पुजारी निताई दास यहां की संत परंपरा के छठवीं पीढ़ी के सदस्य हैं, जो भगवान की सेवा करने में लगे हैं। वर्षों से यहां पर भगवान को नौका विहार कराने की परंपरा चली आ रही है। उसी परंपरा के तहत इस बार भी भगवान जलविहार कर रहे हैं।
भगवान को मिलती है शीतलता
पुजारी का कहना है कि जैसे शीत ऋ तु में भगवान को गर्म वस्त्र धारण कराए जाते हैं, वैसे ही ग्रीष्म ऋ तु में भगवान को शीतलता प्रदान करने के लिए यह महोत्सव आयोजित किया जाता है। इससे भगवान को तो शीतलता मिलती ही है। साथ ही जो श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं, उन्हें भी शीतलता प्राप्त होती है । वैशाख माह की पूर्णिमा तिथि 23 मई 2024 दिन गुरुवार को है। वैशाख पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 22 मई को शाम 6 बजकर 47 मिनट पर हो रही है और समाप्ति अगले दिन यानी 23 मई 2024 दिन शुक्रवार को होगी। उदया तिथि के अनुसार, वैशाख पूर्णिमा 23 मई दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए घर में देवी-देवता की मूर्ति लाया जाता है। मान्यता है कि घर में इन चीजों की मूर्ति लाने से नकारात्मक ऊर्जाएं दूर हो जाती हैं।
वैशाख पूर्णिमा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख पूर्णिमा मां लक्ष्मी को समर्पित होता है। मान्यता है कि जो लोग वैशाख पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। घर में सुख-शांति आती है। आर्थिक तंगी से मुक्ति मिल जाती है। वैवाहिक जीवन खुशहाल बीतने लगता है।