
सागर. विवाह की कानूनी वैधता के लिए विवाह पंजीकरण जरूरी है। इसके बाद भी विवाह पंजीयन को लेकर लोग जागरूक नहीं हैं। दो साल में महज 674 लोगों ने ही नगर निगम व जिला कार्यालय में विवाह पंजीयन कराकर प्रमाण-पत्र लिए हैं। शादी के नाम पर होने वाली जालसाजी से बचने के लिए विवाह का पंजीकरण कराने के साथ ही अन्य आवेदनों के लिए यह बेहद जरूरी है।
जिला प्रशासन के तहत अपर कलेक्टर कार्यालय में भी जिला स्तर पर वर्ष 2008 के पहले हुए विवाह का पंजीयन होता है। यहां 2017 में 21 आवेदन आए हैं। इनमें से एक जरूरी दस्तावेजों के अभाव में निरस्त हो गया जबकि दो लंबित हैं।18 दंपतियों को प्रमाण-पत्र जारी किए गए हैं। शहर को मिलाकर जिलेभर में प्रतिवर्ष सभी धर्मों के करीब 10 हजार विवाह होते हैं। इनमें मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत होने वाले विवाह शामिल हैं। हिंदू धर्म में करीब 8 हजार विवाह, मुस्लिम समाज में 500 से 1 हजार, सिख व ईसाई समाज में भी लगभग पांच-पांच सौ शादियां होती हैं।
10 हजार शादियां होती हैं जिले में हर साल औसतन
2016 में ३५१ लोगों को जारी किए गए प्रमाण-पत्र
2017 में ३०५ दंपती ने पंजीयन कराया
आप ऐसे कराएं पंजीयन
नगर निगम सीमा में रह रहे लोगों को विवाह पंजीयन के लिए वर-वधु की पासपोर्ट साइज की 3-3 फोटो, दोनों पक्ष के विवाह निमंत्रण पत्र, वरमाला की बड़े आकार की फोटो, वर-वधु के माता-पिता के आईडी प्रूफ, मंदिर, मस्जिद, आर्य समाज के प्रमाण-पत्र, मैरिज गार्डन की रसीद, निवास प्रमाण-पत्र, दोनों की कक्षा १०वीं की अंकसूची, वर-वधु का आईडी प्रूफ, शपथ-पत्र, दो गवाहों का आधार कार्ड व अन्य आईडी प्रूफ, वर-वधु का जन्म प्रमाण-पत्र की जरूरत होगी।
ये होते हैं फायदे
पंजीकरण विवाह का प्रमाणित और वैधानिक सबूत है। पासपोर्ट बनाने तथा दांपत्य विवाद के समय भरण-पोषण या विवाह विच्छेद का आवेदन करने, संतान के अधिकार और कई कानूनी विवादों को सुलझाने में मदद मिलती है। जमीन-जायदाद या उत्तराधिकार के विवाद के समय भी पति या पत्नी विवाह प्रमाण-पत्र प्रस्तुत कर अपना दावा पेश कर सकते हैं।
विवाह पंजीयन कराना सरल है। विशेष विवाह पंजीयन की प्रक्रिया जरूर जटिल है, लेकिन इसकी गाइडलाइन बनाई गई है उसे पूरा करना भी जरूरी है। मेरी अपील है कि लोग आगे आएं और यह पंजीयन जरूर कराएं।
आलोक कुमार सिंह कलेक्टर, सागर