MP News: आहट होते ही तकिए के पास से नागिन फ्रिज के नीचे जाकर छिप गई, स्नेक कैचर ने किया रेस्क्यू।
MP News: मध्यप्रदेश के सागर जिले के बड़तूमा गांव में रहने वाले एक परिवार की सांसें उस वक्त हलक में आ गईं जब उन्होंने घर के अंदर फुफकार मारती नागिन को देखा। नागिन घर के अंदर कमरे में लगे बच्ची के बिस्तर में बच्ची के तकिए के पास बैठी थी। जैसे ही आहट हुई तो नागिन तकिए के पास से कमरे में रखे फ्रिज के नीचे छिप गई। परिवार वालों ने बच्ची को सुरक्षित उठाया और घर से बाहर ले आए। इसके बाद स्नेक कैचर को सूचना दी गई और स्नेक कैचर ने फ्रिज के नीचे छिपकर बैठी नागिन का रेस्क्यू किया।
सागर जिले के बड़तूमा गांव में रहने वाले प्रशांत ठाकुर के घर में शनिवार सुबह एक जहरीली नागिन घुस गई। नागिन कमरे में सो रही बच्ची के बिस्तर के तकिए के पास बैठी थी और जैसे ही परिवार के लोगों ने उसे देखा तो उनके रोंगटे खड़े हो गए। परिवार के सदस्यों ने आहट की तो नागिन बच्ची के तकिए के पास से हटकर फ्रिज के नीचे जाकर छिप गई। बच्ची के तकिए के पास से नागिन के जाने के बाद तुरंत माता-पिता हिम्मत कर बच्ची को उठाकर सुरक्षित घर के बाहर ले आए। इसके बाद परिवार के सदस्यों ने स्नेक कैचर बबलू पवार को दी।
स्नेक कैचर बबलू पवार ने परिवार के लोगों से कहा कि नागिन पर नजर रखें। जब स्नेक कैचर बबलू घर पर पहुंचे तब भी नागिन फ्रिज के नीचे छिपी हुई थी। बबलू पवार ने फ्रिज को हटाकर नागिन का रेस्क्यू कर उसे पकड़ा और अपने साथ ले गए। नागिन के पकड़े जाने के बाद परिवार के लोगों ने राहत की सांस ली। स्नेक कैचर बबलू पवार ने बताया कि जो नागिन घर से रेस्क्यू की है वो काफी जहरीली है और कोबरा प्रजाति की है। नागिन की लंबाई करीब ढाई फीट है। वो उसे सुरक्षित जंगल में ले जाकर छोड़ देंगे जिससे कि इंसानों को उससे और उससे इंसानों को कोई खतरा न हो।
दो दिन पहले खंडवा जिले में एक स्नेक कैचर की सांप के काटने से मौत का मामला भी सामने आया था। घटना खंडवा जिले में इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर स्थित भोजाखेड़ी गांव की है जहां सर्पमित्र आशिक खां मंसूरी को एक छोटी सी चूक भारी पड़ गई और उनकी जान चली गई। आशिक खां मंसूरी एक सांप का रेस्क्यू कर रहे थे। जहरीले सांप को पकड़ने के बाद सर्पमित्र आशिक उसे शांत करने के लिए पानी से नहला रहे थे लेकिन इसी दौरान थोड़ी सी पकड़ ढीली हो गई और जहरीले सांप ने उन्हें डंस लिया। सांप के काटने के बाद सर्प मित्र ने तुरंत उसे एक प्लास्टिक के डिब्बे में बंद किया और अपने साथ लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में इलाज शुरू हुआ लेकिन पूरे शरीर में जहर फैलने के कारण सर्पमित्र आशिक खां को बचाना नहीं जा सका और उनकी मौत हो गई।