सागर

ग्रामीण व किसानों के लिए नो-डेवलपमेंट जोन और कंपनियों ने बाउंड्रीवॉल के पास लगाए प्लांट

अपनाया जा रहा दोहरा रवैया, ग्रामीण कर रहे नो-डेलवपमेंट जोन खत्म करने की मांग या फिर सभी पर एक सा नियम किया जाए लागू

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Jun 07, 2026
No-development zones for villagers and farmers, and companies set up plants near the boundary walls.
बाउंड्रीवॉल के पास बने प्लांट। फोटो-पत्रिका

बीना. बीपीसीएल रिफाइनरी प्रबंधन की दोहरी नीती से ग्रामीणों व किसानों में आक्रोश पनप रहा है। पांच किलोमीटर के नो-डेवलपमेंट जोन में ग्रामीणों को कोई भी निर्माण करने के पहले अनुमति लेनी पड़ती है। साथ ही रिफाइनरी के आसपास एक किमी के दायरे को निषिद्ध क्षेत्र घोषित किया है, जिसमें कोई निर्माण नहीं हो सकता है। इसके बाद भी रिफाइनरी विस्तार में कार्य करने आईं कंपनियों ने बाउंड्रीवॉल के पास ही प्लांट लगा लिए हैं।
रिफाइनरी विस्तार कार्य के लिए विभिन्न कंपनियां कार्य कर रही हैं। इन कंपनियों ने रिफाइनरी की बाउंड्रीवॉल से कुछ मीटर दूर ही प्लांट लगाए हैं, जहां मटेरियल तैयार किया जा रहा है। इन प्लांटों को हटाने के लिए अधिकारियों ने नोटिस भी जारी किए थे, लेकिन कई महा बीत जान के बाद भी प्लांट यथावत चल रहे हैं। रिफाइनरी के पास प्लांट संचालित होने से ग्रामीणों में आक्रोश है कि नियम सिर्फ उनके लिए ही बने हैं और कंपनियां मनमर्जी से कार्य कर रही हैं। यह प्लांट भी नो-डेवलपमेंट एरिया के बाहर किए जाना चाहिए या फिर नो-डेवलपमेंट जोन को खत्म किया जाए। प्लांट के साथ-साथ कंपनियों ने मजूदर कॉलोनी भी बना ली हैं, जहां हजारों मजदूर रह रहे हैं। इसको लेकर किसान व ग्रामीण लगातार अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंप रहे हैं। हडक़ल खाती के सरंपच प्रतिनिधि अवधेश तिवारी ने बताया कि रिफाइनरी प्रबंधन के दोहरे रवैया के खिलाफ लगातार शिकायत की जा रही हैं और जब नो-डेवलपमेंट जोन खत्म नहीं होता या फिर सभी के लिए एक जैसे नियम नहीं बनाए जाएंगे तब तक लड़ाई जारी रहेगी।

दो दर्जन से ज्यादा गांव आते हैं इस दायरे में
नो-डेवलपमेंट जोन पांच किलोमीटर के दायरे में हैं, जिसमें दो दर्जन से ज्यादा गांव आते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी आसपास के गांव पार, हडक़ल खाती, किर्रोद, देहरी, आगासौद, पुरैना गांव के लोगों को है। यहां ग्रामीण बिना अनुमति के कोई कार्य नहीं कर पाते हैं। इन्हीं गांवों के लोग लगातार इसका विरोध जता रहे हैं।

समिति से लेनी होती है अनुमति
नो-डेवलपमेंट एरिया में किसी भी प्रकार के निर्माण कार्यों को लेकर क्षेत्रीय विकास समिति से अनुमति लेनी पड़ती है। इस समिति में प्रमुख एसडीएम होते हैं, लेकिन इस समिति की बैठक कब होती है कुछ पता नहीं रहता है। साथ ही ग्रामीणों को अनुमति लेने भी परेशान होना पड़ता है। प्लांट लगाने के पहले समिति से अनुमति भी नहीं लगी गई थी।

जल्द ही लिया जाएगा निर्णय
बैठक में शामिल होने आईं कलेक्टर प्रतिभा पाल ने इस मामले में विस्तृत चर्चा होने की बात कही है और निर्णय लिया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों को करीब तीन दिन का समय दिया गया है।

Published on:
07 Jun 2026 12:12 pm