सागर

सीने में दर्द से तड़पते मरीज की मौत, डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप

तीन बार अस्पताल पहुंचा मरीज, रेफर नहीं करने का आरोप, मौत के बाद भी दवा लिखने का दावा, परिजनों ने सिविल अस्पताल में किया प्रदर्शन
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Aug 01, 2026
Patient in agony from chest pain dies; doctor accused of negligence in treatment.
प्रदर्शन करते हुए परिजन। फोटो-पत्रिका

बीना. सिविल अस्पताल में एक युवक की मौत के बाद इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने जमकर हंगामा किया। उनका कहना है कि मरीज को लगातार सीने में दर्द की शिकायत थी, लेकिन समय रहते न तो उचित उपचार किया गया और न ही किसी बड़े अस्पताल के लिए रेफर किया गया। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि मौत के बाद भी डॉक्टर ने दवाएं लिख दीं। मामले के तूल पकडऩे पर प्रशासन और पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा।
जानकारी के अनुसार कटरा मंदिर के पास रहने वाले बबलू पिता लक्ष्मण कुशवाहा (35) मूल निवासी ग्राम खजरा हरचंद को गुरुवार शाम करीब 7.30 बजे अचानक सीने में तेज दर्द उठा। परिजन उन्हें तत्काल सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार कर दवाएं दीं और ईसीजी कराने की सलाह देकर घर भेज दिया। परिजनों के अनुसार रातभर तबीयत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे दर्द दोबारा तेज होने पर वह मरीज को फिर अस्पताल लेकर पहुंचे। इस दौरान ड्यूटी बदल चुकी थी। परिजनों का आरोप है कि दूसरे डॉक्टर ने केवल इंजेक्शन लगाकर उन्हें फिर घर भेज दिया और रेफर करने की जरूरत नहीं समझी। कुछ ही देर बाद मरीज की हालत और बिगड़ गई। सुबह करीब सात बजे परिजन तीसरी बार उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां जांच के बाद डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक के भाई का आरोप है कि यदि पहली या दूसरी बार ही गंभीरता को देखते हुए उचित इलाज किया जाता अथवा समय पर रेफर कर दिया जाता तो जान बच सकती थी।

मरने के बाद दवा लिखने का आरोप
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि मरीज की मौत के बाद भी डॉक्टर ने दवाएं लिख दीं, जिससे अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए। इस घटना से आक्रोशित परिजन अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए और संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे। सूचना मिलते ही पूर्व जनपद अध्यक्ष इंदर सिंह ठाकुर भी अस्पताल पहुंचे और परिजनों के समर्थन में प्रशासन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी लंबे समय से बनी हुई है, जिससे मरीजों को समय पर बेहतर उपचार नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है।

मामला बिगड़ता देख पहुंची पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी
स्थिति तनावपूर्ण होती देख पुलिस बल अस्पताल पहुंचा और लोगों को शांत कराया। बाद में नायब तहसीलदार हेमराज मेहर ने मौके पर पहुंचकर परिजनों से लिखित आवेदन लिया। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने तथा पात्रता के अनुसार शासन से मिलने वाली आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजनों ने अपना प्रदर्शन समाप्त किया। मृतक अपने पीछे दो बेटों और एक बेटी को छोड़ गया है। परिवार के मुखिया की असमय मौत से पूरे परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा है। अब परिजन न्याय और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

ईसीजी कराने के बाद नहीं लौटे परिजन
रात में आठ बजे तक डॉ. दीपक तिवारी की ड्यूटी थी, जिन्होंने मरीज को ईसीजी कराने के लिए कहा था, लेकिन वह रात में नहीं लौटे। सुबह पांच बजे फिर से परिजन मरीज को लेकर अस्पताल पहुंचे थे, तब डॉ. सौरभ जैन की ड्यूटी थी जिन्होंने उन्हें इंजेक्शन लगाया था। डॉक्टरों की तरफ से लापरवाही नहीं की गई है। शव पैनल से पीएम कराया गया है और बिसरा जांच के लिए एफएसएल भेजा जाएगा।
डॉ. संजीव अग्रवाल, बीएमओ, बीना

Updated on:
01 Aug 2026 12:39 pm
Published on:
01 Aug 2026 12:39 pm