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सागर में बेटों ने पूरी की मां की अंतिम इच्छा, दो लोगों को मिलेगी आंखों की रोशनी

Cornea Donation : 70 वर्षीय शांति लालवानी ने अपने जीवनकाल में नेत्रदान की इच्छा जताई थी। उनके निधन के बाद परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए दोनों आंखों के कॉर्निया दान कर दिए।
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Sep 24, 2026
Cornea Donation
मृतका शांति लालवानी की जीवित अवस्था की तस्वीर (फोटो सोर्स: Patrika)

Sagar News :मध्य प्रदेश के सागर में स्थित संत रविदास वार्ड के कांच गोदाम क्षेत्र में रहने वाली 70 वर्षीय शांति लालवानी के निधन के बाद उनके बेटों ने उनकी अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए दोनों आंखों के कॉर्निया दान कर दिए हैं। बेटों का कहना है कि, मां ने अपने जीवनकाल में ही नेत्रदान करने की इच्छा जताई थी। अब उनके निधन के बाद परिवार की सेहमति से उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए नेत्रदान करने का फैसला लिया गया है।

निधन की सूचना मिलते ही दिवंगत के बड़े बेटे शंकर लालवानी ने बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय (बीएमसी) के नेत्र रोग विभाग और आई बैंक से संपर्क किया। सूचना मिलने के बाद नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण खरे के मार्गदर्शन में आई बैंक की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और सबसे पहले परिवार की सेहमति लेते हुए अंगदान की प्रक्रिया को पूरा किया।

परिजन की सहमति से सुरक्षित किए गए कॉर्निया

आई बैंक की टीम ने तत्काल परिजन की लिखित सहमति और जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद सावधानीपूर्वक दोनों आंखों के कॉर्निया संरक्षित कर लिए। फिलहाल, दोनों कॉर्निया को सुरक्षित तरीके से बीएमसी के आई बैंक में संरक्षित करवाने भेज दिया गया है। नियमानुसार आगे की प्रक्रिया के तहत जरूरतमंद मरीजों के उपचार में इनका उपयोग किया जा सकेगा।

बीएमसी के डीन ने की सराहना

इस मौके पर बीएमसी डीन डॉ. पीएस ठाकुर ने बताया कि, नेत्रदान समाज के लिए पुनीत कार्य है। उन्होंने कहा कि, परिवार ने शोक की घड़ी में भी दिवंगत की इच्छा का सम्मान करते हुए नेत्रदान कराया। ये समाज के लिए बड़ी प्रेरणा का संदेश है।

सावधानीपूर्वक पूरी हुई अंगदान प्रक्रिया

नेत्रदान की प्रक्रिया में आई बैंक की टीम के डॉ. अजय, डॉ. हर्षिता, डॉ. पंकज और डॉ. पुष्पेंद्र समेत नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल विद्यार्थी भी शामिल थे। टीम ने जरूरी सावधानियां पूरी करते हुए सफल तरीके से अंगदान की प्रक्रिया को अंजाम दिया।

परिवार ने दिया बड़ा प्रेरणा संदेश

महादानी महिला के बेटों के फैसले और परिजन की सेहमति से न सिर्फ शांति लालवानी की अंतिम इच्छा पूरी हुई, बल्कि नेत्रदान के जरिए किसी जरूरतमंद के जीवन में रोशनी आने की उम्मीद भी बन गई है। ये कदम समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लोगों को इस जीवन के बाद भी मानव सेवा के लिए प्रेरित करने का बड़ा कदम है।

Updated on:
24 Sept 2026 07:49 pm
Published on:
24 Sept 2026 07:49 pm