नगर निगम के जिम्मेदार शहर को नहीं रख पा रहे स्वच्छ, रात्रिकालीन साफ-सफाई भी बंद
सागर. नगर निगम प्रशासन शहर में साफ-सफाई पर करीब डेढ़ वर्ष से प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दोगुने पैसे खर्च कर रहा। इसके बावजूद चारों ओर गंदगी पसरी हुई है। कचरा एजेंसी रैमकी इन्वायरो लिमिटेड आने के पहले निगम प्रशासन सफाई पर 0.66 रुपए प्रति व्यक्ति प्रतिदिन खर्च कर रहा था। अब यह खर्चा 1.22 रुपए हो गया है। दोगुने खर्च के बाद बदलाव सिर्फ यह आया है कि घरों से सही तरीके से कचरा उठ रहा है।
एेसे समझें गणित
निगम के स्वास्थ्य विभाग में 560 से ज्यादा कर्मचारी हैं। उन्हें प्रतिमाह औसतन करीब 60 लाख रुपए का भुगतान किया जा रहा है। शहर की तीन लाख की आबादी के हिसाब से प्रति व्यक्ति पर डेढ़ साल पहले तक लगभग .66 रुपए प्रति व्यक्ति रोजाना खर्च आ रहा था। डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन शुरू होने के बाद एजेंसी रैमकी को 1692 रुपए प्रति मीट्रिक टन के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। एक दिन में औसतन 90 मीट्रिक टन कचरा निकल रहा है। इस हिसाब से निगम प्रशासन को एजेंसी के लिए प्रतिमाह करीब 45 लाख रुपए देने पड़ रहे हैं। निगमकर्मियों के वेतन और कचरा एजेंसी पर कुल मिलाकर लगभग 1.40 करोड़ रुपए खर्च करना पड़ रहे हैं। इस हिसाब से प्रति व्यक्ति प्रतिदिन सफाई पर खर्च बढक़र 1.22 रुपए हो गया है।
स्थाईकर्मी बनने के बाद बढ़ा खर्च
निगम के दैवेभो कर्मियों को स्थाई बना दिया है। इससे निगम के खजाने पर बोझ बढ़ गया है। अनुमान के मुताबिक सफाईकर्मियों के वेतन में 10 से 15 लाख का इजाफा हुआ है। इस कारण प्रति व्यक्ति प्रतिदिन सफाई पर खर्च भी खर्च बढ़ गया है।
पत्रिका व्यू
कचरा एजेंसी के पूर्व निगम के सफाईकर्मी ही वार्डों से कचरा उठाते थे। अब उन्हें इससे मुक्ति मिल गई है। एेसे में सवाल यह है कि निगम के जिम्मेदार इन सफाईकर्मियों से सही तरीके से काम नहीं ले पा रहे हैं। करीब 50 सफाईकर्मियों को अंशकालिक से पूर्णकालिक कर रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था शुरू करने का महापौर ने दावा किया था। हैरानी है कि रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था भी बंद हो गई है।
शहर में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए प्लानिंग बनाई है। कर्मचारियों के हित में उन्हें स्थाई किया गया, इससे भी प्रति व्यक्ति सफाई का खर्च बढ़़ा है। हमारा प्रयास शहर को हर हाल में साफ-स्वच्छ रखना है।
अनुराग वर्मा, निगम आयुक्त