15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

टिकाऊ की जगह खरीदे काम चलाऊ मोबाइल टॉयलेट, स्पेस है नहीं, क्वालिटी भी घटिया

केंट प्रशासन ने तीन माह में 12 चलित व तीन बायो टॉयलेट की खरीदी पर करीब 50 लाख रुपए खर्च कर दिए.

3 min read
Google source verification

सागर

image

Sanjay Sharma

Oct 18, 2017

sagar cantt board mobile toilet

sagar cantt board mobile toilet

सागर. गुणवत्ताहीन कामों के चलते चर्चा का केंद्र बने केंट में तकनीकी अधिकारियों ने केंद्र सरकार के सबसे प्राथमिकता वाले स्वच्छता अभियान को भी कमीशन के खेल का जरिया बना लिया है। अपने लाभ के लिए तकनीकी अधिकारियों द्वारा गुणवत्ता से समझौता किया और कम लागत के मोबाइल टॉयलेट की खरीदी कर डाली। केंट प्रशासन ने तीन माह में 12 चलित व तीन बायो टॉयलेट की खरीदी पर करीब 50 लाख रुपए खर्च कर दिए। जबकि कमीशन के खेल से दूर यही टॉयलेट काफी कम खर्च में खरीदे जा सकते थे।

केंट सूत्रों के अनुसार गुणवत्ता से समझौता कर टिकाऊ मोबाइल टॉयलेट छोडक़र कामचलाऊ टॉयलेट की खरीदी गई। न तो इनकी क्वालिटी ढंग की है और न ही पर्याप्त स्पेस है। बताया जाता है कि वाहन शाखा के प्रभारी इंजीनियर को दूर रख सिविल शाखा में इंजीनियर एसके जैन द्वारा खरीदी कराई। वहीं जिसके हाथ में स्वच्छता अभियान के तहत चलित शौचालय का प्रबंधन सौंपा जाना था उसे भी प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया।

महाराष्ट्र की कंपनी से लिए टॉयेलट
हर काम में सिस्टम से अलग करने के वाले केंट प्रशासन द्वारा चलित टॉयलेट की खरीदी महाराष्ट्र के मिरज शहर की न्यू साई फेब्रिक कंपनी से की गई। जबकि इससे बेहतर गुणवत्ता और कम दाम वाले चलित टॉयलेट वाली दूसरी कंपनियों को अनदेखा किया गया। पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया के कारण प्रतिस्पर्धा के बिना 12 चलित व 3 बायो टॉयलेट खरीद लिए गए। खरीदी को लेकर शुरू ही आरोप लगाए गए, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया।

भुगतान में भी दिखाई फुर्ती
स्वच्छता अभियान की आड़ लेकर केंट प्रशासन द्वारा चलित-बायो टॉयलेट की खरीदी बिना टेंडर प्रक्रिया की नियम शर्तों का पालन किए कर ली गई। तीन माह में अलग-अलग समय पर कंपनी ने केंट प्रशासन को टॉयलेट सौंपे और करीब दो माह पहले उन्हें वार्ड 4, 5, 6 और 7 में खड़ा कराया गया। बोर्ड के सदस्यों की सहमति की भी परवाह नहीं की गई और तुरत-फुरत में 50 लाख रुपए से ज्यादा राशि का भुगतान भी कर दिया गया।

एेसे किया 50 लाख का गोलमाल
केंट के तकनीकी अधिकारी एक दशक से भी ज्यादा समय से एक ही शाखा में जमे हैं। ऊपर से नीचे तक पूरे सिस्टम में उनका दखल है। वे अपने गुणा-भाग लगाकर कंपनियों को लाभ पहुंचाते हैं। महाराष्ट्र की कंपनी को सप्लाई ऑर्डर जारी कर दिया गया। पहले इश्तहार दिया था।

सीधी बात... नवीन गुप्ता, मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव मप्र
रिपोर्टर : हैलो, मैं एनजीओ चलाता हूं, चलित टॉयलेट खरीदना है?
गुप्ता: हां, कहां से बोल रहे हैं और कितने सीटर चाहिए।
रिपोर्टर : आठ सीटर, कितनी कॉस्ट आएंगी एक टॉयलेट की?
गुप्ता: ज्यादा है 3.80, आप को कितने टॉयलेट की डिमांड है।
रिपोर्टर : मुझे चार चलित टॉयलेट चाहिए, लेकिन कीमत बहुत ज्यादा है?
गुप्ता: कीमत कम हो जाएगी, आपको कितने में चाहिए ।
रिपोर्टर : मुझे दूसरी कंपनियों ने 2.50 लाख के आसपास बताए हैं रेट?
गुप्ता: रेट हम भी कम कर देंगे बस गुणवत्ता कम हो जाएगी।
रिपोर्टर : गुणवत्ता कम हो जाएगी से क्या मतलब?
गुप्ता: मतलब ये कि हम उसमें सामान की क्वालिटी गिरा देंगे ।
रिपोर्टर : इससे क्या अंतर पड़ेगा?
गुप्ता: अंतर पड़ेगा, जहां हम पांच साल की ग्यारंटी लेते उसकी एक साल लेंगे।
रिपोर्टर : गुणवत्ता न गिरे और कम में मिले एेसा कोई उपाए।
गुप्ता: आपको खुद चलाना है तो अच्छी खरीदिए, 20-30 हजार हम कम कर देंगे।

मुझे टॉयलेट के संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। कितनी राशि में चलित-बायो टॉयलेट खरीदे गए और कितना भुगतान किया, मुझे इसकी जानकारी नहीं है।
आरके उपाध्याय, स्वच्छता अधीक्षक

महाराष्ट्र की कंपनी से अधिकारियों के निर्देश पर १२ चलित व ३ बायो टॉयलेट खरीदे हैं। इनका भुगतान भी किया गया है। गुणवत्ता में भी यह अच्छे हैं।
एसके जैन, प्रभारी सिविल शाखा

स्वच्छता अभियान के तहत टॉयलेट खरीदी में जनप्रतिनिधियों को भरोसे में नहीं लिया गया, निविदा प्रक्रिया की भी अनदेखी की गई और 15 टॉयलेट खरीदकर उनका भुगतान कर दिया गया। जनता को समुचित लाभ मिले इसकी प्लानिंग के बिना केवल खरीदी और भुगतान की चिंता की गई। खरीदी में आर्थिक अनियमितता की भी शंका है।
वीरेन्द्र पटेल, पार्षद वार्ड 7

चलित व बायो टॉयलेट खरीदी केंट प्रशासन ने अपने स्तर पर निर्णय लेकर की है। मेरी जानकारी के अनुसार स्वच्छता अभियान के तहत यह खरीदी जल्दबाजी में की गई। मेरे वार्ड में अभी ३ टॉयलेट रखे गए हैं जबकि तीन और रखे जाना है। प्रक्रिया की अनदेखी से गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
प्रभुदयाल पटेल, पार्षद वार्ड 6