सागर

अठारह माह में बदल जाएगी बीना स्टेशन की तस्वीर, यार्ड रिमॉडलिंग से बढ़ेगी ट्रेनों की स्पीड और सुरक्षा

पश्चिम मध्य रेलवे जीएम ने ली अधिकारियों के साथ ली बैठक, परख से महादेवखेड़ी, मालखेड़ी और आगासौद स्टेशन का किया निरीक्षण, लोकेशन बॉक्स भी किए चैक
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Aug 02, 2026
The face of Bina station will change in 18 months; yard remodeling will boost train speeds and safety.
बैठक में प्रोजेक्ट संबंधी जानकारी देते हुए अधिकारी। फोटो-पत्रिका

बीना. पश्चिम मध्यम रेलवे जीएम दिलीप कुमार सिंह ने शनिवार को बीना रेलवे स्टेशन पर मंडल के अधिकारियों के साथ बैठक कर स्टेशन निर्माण और यार्ड रिमॉडलिंग कार्य को लेकर चर्चा की। करीब एक घंटे तक बैठक चली।
उन्होंने बताया कि यार्ड रिमॉडलिंग और स्टेशन निर्माण का कार्य साथ-साथ होना है। स्टेशन निर्माण का कार्य इसी माह से शुरू होगा और अठारह माह में इसे पूरा करने का लक्ष्य है। यार्ड रिमॉडलिंग में झांसी से आने वाली तीसरी लाइन को जोड़ा जाएगा और कई सुविधाएं पैसेंजर व मालगाड़ी ट्रेनों के लिए उपलब्ध कराईं जाएंगी। वर्तमान में यार्ड में आते समय ट्रेनों की गति धीमी हो जाती है, जो बढ़ जाएगी। उन्होंने बताया कि रिमॉडलिंग का कार्य दो जोन की बीच होना है, जिसमें एनसीआर और डब्ल्यूसीआर शामिल हैं। इस कार्य के लिए रेलवे बोर्ड को प्रपोजल भेजा गया है, जैसे ही स्वीकृति मिलेगी काम शुरू कर दिया जाएगा। बैठक में भोपाल डीआरएम पंकज त्यागी सहित मंडल के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

महादेवखेड़ी, मालखेड़ी और आगासौद स्टेशन विंडो निरीक्षण
जीएम विशेष वाहन परख से महादेवखेड़ी, मालखेड़ी और आगाासौद स्टेशन का विंडो निरीक्षण करते हुए भोपाल के लिए रवाना हुए। रास्ते में भोपाल रूट पर कुरवाई-कैथोरा के पास ऑटोमेटिक सिग्नलिंग व्यवस्था देखी और लोकेशन बॉक्स भी देखा।

दो माह का लगेगा समय
रिमॉडलिंग कार्य में दो माह का समय लगेगा और इस कार्य के दौरान कई ट्रेनें प्रभावित होंगी, जिन्हें डायवर्ट कर दूसरे रूट से निकाला जाएगा। इसके लिए तैयारी पूरी है, सिर्फ बोर्ड की अनुमति का इंतजार है।

सुबह 8 बजे वाली ट्रेन चलाने पर पर होगा विचार
बीना से सागर तरफ सुबह 8 बजे जाने वाली पैसेंजर ट्रेन कोरोना काल से बंद है और इसे चलाने की मांग पर जीएम ने कहा कि रिमॉडलिंग कार्य के बाद इसपर विचार किया जाएगा।

यार्ड रिमॉडलिंग के बाद बढ़ेगी सुरक्षा
यार्ड रिमॉडलिंग कार्य पूरा होने के बाद वर्तमान में यहां संचालित आरआरआई (रूट रिले इंटरलॉकिंग) प्रणाली की जगह अत्याधुनिक ईआई (इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग) प्रणाली लागू होगी। ईआई सिस्टम पूरी तरह कंप्यूटरीकृत होने से सिग्नल और पॉइंट संचालन अधिक सटीक व सुरक्षित होगा, इससे मानवीय त्रुटियों की संभावना काफी कम हो जाएगी और ट्रेनों का संचालन अधिक सुगम होगा। साथ ही ट्रेनों की आवाजाही में समय की बचत होगी।

Updated on:
02 Aug 2026 11:55 am
Published on:
02 Aug 2026 11:55 am