सागर

मजबूरी वाले धर्म को हम धर्म नहीं : सुधा सागर महाराज

प्रत्येक वस्तु अपना एक स्वतंत्र अहमियत रखती है, जिसे शास्त्री भाषा में धर्म बोलते हैं। एक स्वभाव रूप धर्म होता है, एक साधन रूप धर्म होता है, एक साध्य रूप धर्म होता है और एक मजबूरी का धर्म होता है। अपन मजबूरी वाले धर्म में जीते है और वो तो धर्म है ही नहीं।

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Nov 07, 2024
sudhasagarji.

सागर. प्रत्येक वस्तु अपना एक स्वतंत्र अहमियत रखती है, जिसे शास्त्री भाषा में धर्म बोलते हैं। एक स्वभाव रूप धर्म होता है, एक साधन रूप धर्म होता है, एक साध्य रूप धर्म होता है और एक मजबूरी का धर्म होता है। अपन मजबूरी वाले धर्म में जीते है और वो तो धर्म है ही नहीं। यह बात निर्यापक मुनि सुधा सागर महाराज ने भाग्योदय में आयोजित धर्मसभा में बुधवार को कही। मुनि ने कहा कि आप 24 घंटे में जो कुछ भी करते हैं, मजबूरी में कर रहे है। जो भी आप सोच रहे हैं आप सोचने को मजबूर हैं, क्योंकि आपकी हर क्रिया प्रतिकार है। संसार में जितने भी सुख है, यह सुख नहीं प्रतिकार है और जिस चीज का प्रतिकार करना पड़ता है, उसका नाम मजबूरी का धर्म है। मुनि ने कहा कि सारी दुनिया तुम्हारे लायक है, भगवान, गुरु, माता, पिता, धन, परिवार सब तुम्हारे लायक है और तुम किसी के लायक हो या नही, ये सबसे बड़ी भूल है। सुबह उठकर यह भाव करना है - मेरे पास जो है, क्या यह किसी के काम आ सकता है। तुम्हारे पास मन है तो क्या यह मन किसी के काम आ सकता है, मैं तपस्वी नही हूं, लेकिन मेरा मन जरूर एक काम में आ सकता है। मैं संसार को सुखी करने की भावना कर सकता हूं। यह भावना बहुत बड़ी ताकत है।

एकता समिति के सदस्यों ने लिया आशीर्वाद

सागर. एकता समिति के सदस्यों ने बुधवार को भाग्योदय पहुंचकर जैन मुनि सुधा सागर महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। समिति ने महाराज को समिति के कार्यों से अवगत कराया। सदस्यों को मुनिश्री ने समाज सेवा में सक्रिय रहने के लिए आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर फादर पाल, अब्दुल रशीद भाई ,सुधीर जैन ,शरद गुप्ता, राजेंद्र मलैया, प्रदीप समैया, संजय शास्त्री, निलेश समैया, नरेंद्र जैन, नीरज सेठ, राजेंद्र सोनी मामा, कमलचंद जैन, विमल जैन एवं प्रमोद पटेल आदि उपस्थित थे।

Published on:
07 Nov 2024 11:48 am
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