अब इंटरनेट के दौर में कार्यक्रम के अलावा भी टीवी पर और भी बहुत कुछ है, जो आप देख सकते हैं।
सागर. आज विश्व टेलीविजन दिवस है। टीवी प्रेमियों के लिए यह दिन बड़ा खास है, क्योंकि टीवी हमेशा से हमेशा जीवन का अहम हिस्सा रहा है। अब तो इसके बिना जीवन की कल्पना करना भी मुश्किल सा लगता है। टेली यानी दूर और विजन यानी दर्शन, शब्दों के अर्थ गहरे हैं और पूरी दुनिया सिमट जाती है इसी छोटे टेलीविजन पर। बुद्धू बक्सा रहा टीवी अब लोगों को बुद्धिमान बना रहा है। नए फीचर्स और डिजाइन लोगों को अब एलईडी की ओर आकर्षित कर रहे हैं। आइए जानते हैं, इसके बारे में...
टीवी की नई परिभाषा
कभी टीवी पर हम कार्यक्रम तक ही सीमित थे। अब इंटरनेट के दौर में कार्यक्रम के अलावा भी टीवी पर और भी बहुत कुछ है, जो आप देख सकते हैं।
1996 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दी थी टेलीविजन डे को स्वीकृति
15 सितंबर 1959 में आया था देश में टीवी
1972 तक टेली सेवाएं अमृतसर और मुम्बई के लिए बढ़ाई गईं
1975 तक देश के सात शहरों में ही देखा जा सकता था टीवी
1982 में की गई थी देश में राष्ट्रीय प्रसारण की शुरुआत
टीवी पर एप्लीकेशंस
आज स्मार्ट टीवी पर कई एप्लीकेशंस प्री-लोडेड आती हैं या बाद में एप स्टोर से लोड की जा सकती हैं। कुछ स्मार्ट टीवी से तो नेटफ्लिक्स, अमेजन पर लाइव टीवी, फिल्म स्ट्रीमिंग होती हैं।
इंटरनेट सर्फिंग भी
कई स्मार्ट टीवी में तो बिल्टइन वेब ब्राउजर आते हैं। इन पर इंटरनेट सर्फ कर सकते हैं। सोफा पर बैठे-बैठे फोटो और वीडियो देख सकते हैं, उन्हें शेयर कर सकते हैं।
सिर्फ स्वॉप से शेयरिंग
एक ही ब्रांड के स्मार्ट फोन और स्मार्ट टीवी हैं तो शेयरिंग और भी आसान हो गई है।
20 हजार से 4 लाख तक का टीवी
एलईडी टीवी के फीचर की वजह से ग्राहक ४ लाख रुपए तक का टीवी खरीदने बाजार में तैयार हैं। विक्रेता अविनाश चौधरी ने बताया कि हर कंपनियां अलग-अलग फीचर दे रही हैं। शहर में सबसे ज्यादा 20 से 40 हजार रुपए के टीवी की डिमांड है। जो टीवी के ज्यादा शौकीन हैं अब वो ४ लाख रुपए तक का टीवी खरीदने को तैयार है। इन टीवी की खासियत यह है कि इसमें 100 प्रतिशत कलर, वन रिमोट कंट्रोल, ब्लूटूथ, स्मार्ट हब, १५०० एचडीआर, कवर्ड स्क्रीन आदि फीचर हैं, इस टीवी की साइज 75 से 80 इंच के बीच में रहती है।
मोहल्ले में एक ही होता थी ब्लैक एंड व्हाइट टीवी
टीवी विक्रेता अंशुल जैन ने बताया कि वे 1980 से शॉप पर टीवी बेच रहे हैं। उस समय शहर में हर मोहल्ले में एक ही टीवी होती थी। कीमत ज्यादा होने की वजह से बड़े घर के लोग ही टीवी खरीदते थे। उसके बाद जैसे-जैसे नई तकनीकी आई, टीवी के दामों में कमी और क्वालिटी बढ़ती गई। अब 10 हजार रुपए से लेकर ४ लाख रुपए तक टीवी ग्राहक खरीद रहे हैं।
एंटीना से डीटीएच
छतों पर लगने वाला एल्यूमीनियम का चौकोर लंबा एंटीना किसी समय पर स्टेटस सिंबल हुआ करता था। फिर डीडी मेट्रो आने के बाद जलेबीनुमा एंटीना आया। समय बदला और अब छतें अलग अलग कंपनी की डीटीएच की छतरियों से अटी दिखती हैं।